संतकबीरनगर। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट भूपेंद्र राय की कोर्ट ने तहरीर के विरुद्ध न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने के मामले में वादी मुकदमा के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया का गलत रूप से इस्तेमाल करने के लिए प्रकीर्ण वाद दर्ज कर दंडित करने का आदेश दिया है। साथ ही एससी एसटी एक्ट के चार आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि थाना महुली अंतर्गत ग्राम तरयापार निवासी बसंती ने थाना महुली पुलिस को तहरीर दी कि 17 मई 2012 को उसके गांव के जाहिद अली ने उसकी जमीन पर दुकान रखी था, जिस पर उसने मना कर दिया। उसी रंजिश को लेकर जाहिद अली, रियाजुद्दीन, बबलू गंगा व रसूल ने अपमानित करते हुए अपशब्द कहते हुए मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
शोर मचाने पर गांव के लोग पहुंचे और बचाव किया। तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट भूपेंद्र राय की कोर्ट में नौ गवाहों ने गवाही की तथा दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। वादी मुकदमा ने बार-बार बयान बदला और न्यायालय में झूठा बयान दिया। अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में असफल रहा।
विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट भूपेंद्र राय की कोर्ट ने संपूर्ण तथ्यों परिस्थितियों एवम पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर चारों को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही साथ वादी मुकदमा के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है।