संतकबीरनगर। जिले में फार्मर रजिस्ट्री का औसत राज्य औसत से चार प्रतिशत कम है। अभी तक सिर्फ 42.56 प्रतिशत ही फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति हुई है। इस प्रगति पर डीएम आलोक कुमार ने असंतोष व्यक्त करते हुए शत प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री के निर्देश दिए हैं। इसे अभियान चलाकर पूर्ण करने की बात कही है।
समीक्षा के दौरान उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने अवगत कराया कि फार्मर रजिस्ट्री से किसान की अलग-अलग खतौनी एक जगह पर एकत्र हो जाती है। फार्मर रजिस्ट्री में कृषक व उसके पिता का नाम, उसके स्वामित्व वाले सभी गाटा संख्या, सहखातेदार होने की स्थिति में गाटा में किसान का अंश, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड संख्या एवं इकेवाईसी का विवरण दर्ज किया जाएगा।
रजिस्ट्रेशन उपरांत प्रमाण पत्र जारी होता है उसे गोल्डन कार्ड कहते हैं। अब तक जनपद में 42.56 प्रतिशत प्रगति हुई है एवं राज्य का औसत प्रगति 46.56 प्रतिशत है और अधिकतम प्रगति वाले जनपद का प्रतिशत 56 है। अन्य जनपदों के अपेक्षाकृत अपने जनपद की प्रगति संतोषजनक नहीं है।
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चार तरीके से की जाती है फार्मर रजिस्ट्री
फार्मर रजिस्ट्री का संचालन चार तरीके से किया जा रहा है। जनसुविधा केंद्र, सेल्फ मोड, सहायक मोड एवं कैम्प मोड। कैंप मोड में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य राजस्व विभाग, कृषि विभाग एवं पंचायत विभाग द्वारा किया जा रहा है। जिसे शासन ने 30 अप्रैल 2025 तक पूर्ण कराए जाने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति जन सुविधा केंद्र के माध्यम से अधिक हो रही है। जबकि किसान स्वयं अथवा किसी अन्य सहायक के माध्यम से अपने खतौनी की रजिस्ट्री फार्मर रजिस्ट्री अभियान के अंर्तगत कर सकता है।
नहीं मिलेगी किसान सम्मान निधि की अगली किस्त
उन्होंने बताया कि किसानों का फार्मर रजिस्ट्री तैयार होने के बाद उन्हें सिर्फ पीएम किसान सम्मान निधि ही नहीं बल्कि केसीसी, फसल बीमा, एमएसपी कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड जैसी योजनाओं का भी लाभ प्राप्त होगा। डिजिटल डाटा समय-समय पर अपडेट किया जाएगा। डिजिटल डाटा तैयार होने के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों को सीधे मिल सकेगा। फार्मर रजिस्ट्री न होने से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की अगली किस्त का लाभ किसानों को प्राप्त नही होगा एवं नए किसानों के पंजीकरण के लिए फार्मर रजिस्ट्री का होना अनिवार्य है।