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हादसे के शिकार लोगों का शव गांव पहुंचा तो मचा कोहराम

Tue, 12 Jun 2018 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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महेश के घर पर ढांढस बंधाने पहुंचे कांग्रेस के विधायक और जिलाध्यक्ष। - फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। कन्नौज के पास हुए हादसे में मौत के शिकार हुए लोगों का शव उनके घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। परिजनों का विलाप देख कर मौके पर जुटी भीड़ की आंखें में भी नम हो गईं। जिले के निवासी बीटीसी के तीन छात्र, शिक्षक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। अलग-अलग जगहों पर हादसे में मरे लोगों का अंतिम संस्कार हुआ।      
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शहर के ट्यूबवेल कॉलोनी निवासी बीटीसी छात्र महेश गुप्ता पुत्र कृष्ण मुरारी लाल गुप्ता का शव जैसे ही उनके घर पहुंचा, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। नात-रिश्तेदार भी गमगीन थे। शव को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी थी। अंतिम दर्शन के बाद लोग शव को अंतिम संस्कार के लिए बिडहर घाट ले गए।

जहां पिता ने बेटे को मुखाग्नि दी। मनियरा प्रतिनिधि के अनुसार, थवईपार निवासी बीटीसी छात्र 20 वर्षीय अभय प्रताप सिंह पुत्र देवेंद्र सिंह का शव मंगलवार की सुबह जैसे ही गांव पहुंचा, गांव के लोगों की भीड़ जुट गई। शव को देखने के लिए लोग उत्सुक नजर आए, परिवार वालों की चीख-पुकार से मातमी माहौल हो गया। अंतिम संस्कार के लिए लोग शव को अयोध्या ले गए, जहां पिता ने बेटे को मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद लोगों की आंखे भर आई। गांव का हर कोई होनहार बेटे की मौत से गमगीन नजर आया। गांव में पूरे दिन सन्नाटा पसर रहा।
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धनघटा प्रतिनिधि के अनुसार महुली क्षेत्र के ग्राम कड़सरा निवासी कन्नौज हादसे के शिकार बीटीसी छात्र निखिलेश मौर्या का शव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। मौके पर गांव वालों की भीड़ जुटी थी। कुआनो नदी के तट पर मुखलिसपुर में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। बुजुर्ग पिता ने जब जवान बेटे के शव को मुखाग्नि दी तो मौजूद लोग रो उठे।

जन सेवा केंद्र चलाने वाले धर्मेश ने आरोप मढ़ा कि उसका भाई निखिलेश शैक्षणिक टूर पर नहीं जाना चाहता था। प्रबंध तंत्र ने धमकी दी थी कि यदि टूर पर नहीं गए तो 10 हजार रुपये जमा करना पड़ेगा। जबकि टूर पर जाने पर सिर्फ आठ हजार रुपये ही देने होंगे नहीं तो प्रेक्टिकल में 10 नंबर काट लिए जाएंगे। आरोप है कि उस पर दबाव बनाने के लिए ही उसे टीम लीडर की जिम्मेदारी देकर टूर पर जाने के लिए विवश किया गया था।

सवाल खड़ा किया कि जिस स्थान पर बस का तेल खत्म हुआ, उससे लगभग दस किमी पहले ही पंप मौजूद था। फिर भी पंप पर ईंधन नहीं डाला गया। घटना की समय से सूचना भी नहीं दी गई। परिजनों के साथ साथ ग्रामीणों ने एक सुर में पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने की मांग की।

हरिहरपुर प्रतिनिधि के अनुसार, बीटीसी छात्रों के साथ टूर पर गए हादसे के शिकार हुए नगर पंचायत हरिहरपुर निवासी 20 वर्षीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सतीश का शव मंगलवार की सुबह उसके घर पहुंचा तो वहां कोहराम मचा गया। मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई। लोगों की खामोशी को चीरता परिजनों का चीत्कार सुनकर लोगों का कलेजा कांप उठा।

युवक का जनाजा निकलते समय माता इंद्रावती और बहनो के करुण क्रंदन से माहौल बोझिल सा हो गया । अपने बेटे का शव लिए पिता रामफेर की आंखों के आंसू सूख गए थे। कांपते हांथों से पिता ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की फिर गांव के लोगों के साथ श्मशान घाट की ओर चल दिए।

इकलौते बेटे के शव के साथ पिता रामफेर न जाने कहां खोए थे। शायद उन्हें अपने बेटे के साथ बीते लमहों की यादें बहुत पीड़ा पहुंचा रही थी। बिड़हर घाट पर पिता ने जब अपने बेटे को मुखाग्नि दी तो घाट पर मौजूद लोगों की जुबां से आहें निकल आई।

लोगों के मुंह से यही निकला  कि भगवान किसी पिता को ऐसा दिन न दिखाए कि उसे अपने बेटे को मुखाग्नि देनी पड़े। नगर के पूर्व चेयरमैन बृजेश पाल, हियुवा नेता सुभाष त्रिपाठी, सेवानवृत  शिक्षक राम भरोस पांडेय, पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल, पूर्व सभासद वीरेंद्र यादव, विनोद कुमार, ने सड़क हादसे में मारे लोगों के प्रति अपनी संवेदना जताई। 
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