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बंडा बाजार में हुए हादसे से संबंधित खबर....

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मां की गोद और चाचा की सतर्क निगाहें भी नहीं बचा पाईं श्रेयांश को
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बीमार बेटे के इलाज के लिए देवर के साथ जा रही थीं बबिता
बेटा साथ छोड़ गया और मां का अस्पताल में चल रहा इलाज
इंद्रेश यादव
हैंसर। महुली थाना क्षेत्र के मुुखलिसपुर गांव के कजियापुर टोला निवासी 22 वर्षीय बबीता पत्नी सूरज सोमवार की दोपहर में एक वर्ष के बेटे श्रेयांश का इलाज कराने धनघटा जा रही थीं। देवर नीरज के साथ निकली बबिता ने बेटे को गोद में बड़े जतन से छिपा रखा था तो बगल में बैठे नीरज की भी उस पर सतर्क निगाह थी, लेकिन अनहोनी ने मां और चाचा के सामने ही श्रेयांश की बाल लीला को खत्म कर दिया। बेटा रास्ते में साथ छोड़कर चला गया और मां खुद घायल होकर अस्पताल पहुंच गई।
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सोमवार की सुबह श्रेयांश की तबियत ठीक नहीं लगी तो मां बबिता ने उसके इलाज की बात कही। दोपहर में देवर नीरज व बेटे श्रेयांश को साथ लेकर वह टैंपो से धनघटा के लिए चलीं। जिस टैंपा में बबिता सवार हुईं शायद हादसा उसी का इंतजार कर रहा था। टैंपो में चालक समेत कुल छह लोग थे। बाइक की टक्कर के चलते टैंपो पलट गया और बबिता, नीरज, श्रेेयांश व किशोरी को गंभीर चोटें आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बबिता ने बेटे श्रेयांश को गोद में छिपा रखा था जबकि बगल में देवर नीरज बैठे थे। सड़क पर पलटे टेंपो को जब उठाया गया तो उसके नीचे दबी बबीता ने बेटे को कलेजे से कसकर चिपका रखा था। खुद घायल होकर अधमरा हुई बबीता अपनी गोद से बेटे श्रेयांश को नहीं दे रही थीं। जबरन उसकी गोद से बच्चे को लेकर सीएचसी मलौली पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने बबिता की हालत भी नाजुक बताते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन मां को अपनी चोट की जगह बेटे की चिंता सता रही थी। बेटे के मौत की बात सुनते ही घायल पड़ी बबीता अपना दर्द भूल दहाड़ मारकर रोने लगी। मंजर देख मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। दो साल पहले ही ससुराल आई बबीता के साथ हादसे की खबर सुनकर मायके पक्ष के लोग भी पहुंच गए।
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