- जिला अस्पताल का हाल, इंप्लांट खरीद खर्च के भार से जूझ रहे हैं मरीज
- खर्च न उठा पाने वाले मरीजों को कर दिया जाता है रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में हड्डी के डाक्टर हैं, ऑपरेशन थियेटर है, लेकिन नहीं है मरीजों के ऑपरेशन में लगने वाले इंप्लांट (प्रत्यारोपक सामग्री) की सुविधा। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सरकारी स्तर पर इंप्लांट खरीद की सुविधा नहीं है। जिसके कारण मरीजों को भारी खर्च करना पड़ता है। कभी-कभी यह खर्च उठाना मरीज के लिए बहुत भारी होता है। मरीजों के इस पीड़ा को जानने और सुनने वाला कोई नहीं है।
आयुष्मान कार्ड धारकों को छोड़ कर हड्डी के सामान्य मरीजों के ऑपरेशन में लगने वाले इंप्लांट के खरीद की सुविधा सरकारी स्तर पर नहीं होती है। सस्ते इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे हड्डी के ऑपरेशन के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
सूत्रों के मूताबिक ऑपरेशन में लगने वाले इंप्लांट खर्च न उठा पाने वाले मरीजों दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। वहां भी उसे इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है और वह थक हार कर रुपये की किसी तरह व्यवस्था कर सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन कराता है या फिर इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल में जाने को विवश होता है।
रिश्तेदारों से लिए 70 हजार रुपये तब हुआ ऑपरेशन
दुर्घटना में पैर टूटने से पीड़ित सत्यम पुत्र जगत यादव जिला अस्पताल में भर्ती है। सत्यम ने बताया कि पैर के आपरेशन में 70 हजार से अधिक खर्च हो गया। पैर में इंप्लांट (उपकरण) पड़ा है। रुपये नहीं थे, किसी तरह रिश्तेदारों से व्यवस्था कर दिया गया, तब जाकर ऑपरेशन हुआ। डाॅक्टर आज छुट्टी करने को कहे हैं।
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डाॅक्टर ऑपरेशन के उपकरण खुद मंगवाकर लगाते हैं
जिला अस्पताल के आर्थो वार्ड में भर्ती सिकरीगंज निवासी जीतेन्द्र पुत्र राम समुझ का दो दिन पहले दुर्घटना में पैर फैक्चर हो गया। पीड़ित जितेंद्र ने बताया कि डाॅक्टर ने बृहस्पतिवार को ऑपरेशन का समय दिया है। पैर में इंप्लांट लगेगा। डाॅक्टर ने 40 हजार से अधिक का खर्च बताया है। रुपये की व्यवस्था की जा रही है। एक मरीज ने बताया कि डाॅक्टर इंप्लांट स्वयं मंगवाकर लगवाते हैं या वह बताते है कि यहां से ही इंप्लांट लेना है। इस खेल में मरीज पिस रहा है लेकिन इसे देखने समझने वाला कोई नहीं है।
हड्डी के ऑपरेशन में लगने वाले इंप्लांट (उपकरण) की खरीद सरकारी स्तर पर नहीं होती है। यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू है। ऑपरेशन में लगने वाले इंप्लांट मरीज को स्वयं लाना होता है। आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों के ऑपरेशन में लगने वाले इंप्लांट की खरीद सरकारी स्तर से की जाती है।
-डाॅ. भवनाथ पाण्डेय, सीएमएस