संतकबीरनगर जिले में धनघटा क्षेत्र के रामजानकी मार्ग पर शनिवार की दोपहर पारासिर के ग्रामीणों ने जाम लगा दिया। गांव वालों का आरोप था कि उनके गांव की कोटेदार की मौत महज चार दिन पहले हुई है। बगैर किसी सूचना और जानकारी के आपूर्ति विभाग ने गांव का कोटा दूसरे गांव में संबद्ध कर दिया। कोटे के खाद्यान्न का वितरण उनके गांव से ही होना चाहिए।
दोपहर 12 बजे से दो बजे तक रास्ता जाम रहा। इससे राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान वाहनों की लंबी लाइन लग गई। चौकी इंचार्ज पौली ने गांव के लोगों को समझा-बुझाकर रास्ता खाली कराया। उसके बाद आवागमन शुरू हो सका।
ग्रामीण अंकिता, सुभद्रा, यशोदा, प्रभावती, संजय, हरिद्वार, राम सहाय आदि का कहना था कि पारासिर की कोटेदार शीला देवी की मौत चार दिन पहले 21 दिसंबर को हो गई। इस बात की जानकारी गांव के प्रधान या किसी अन्य ने आपूर्ति विभाग को नहीं दी। इसके बावजूद आपूर्ति विभाग के लोगों ने मनमाने ढंग से उनके गांव का कोटा अंजाव गांव से अटैच कर दिया। यह पारासिर से दो किलोमीटर से अधिक दूरी पर है।
खाद्यान्न का वितरण गांव से ही करने के लिए ग्रामीणों ने रास्ता जाम करके प्रदर्शन किया। इस दौरान सड़क के दोनों तरफ लंबी कतार में वाहन खड़े रहे। इसकी जानकारी चौकी इंचार्ज पौली को हुई तो वह मौके पर पहुंचे और गांव के लोगों को समझा-बुझाकर रास्ता खाली करवाया। दो घंटे बाद आवागमन शुरू हो सका।
सप्लाई इंस्पेक्टर सौरभ कुमार गोस्वामी का कहना है कि पारासिर की दुकान अभी किसी गांव से अटैच नहीं की गई है। पारासिर की दुकान जिस स्थान से संचालित होती थी, खाद्यान्न उसी स्थान पर जा रहा था। गलतफहमी के कारण गांव के लोगों ने खाद्यान्न को रोककर रास्ता जाम किया। दुकान उसी गांव से संबद्ध की जाएगी, जहां से खाद्यान्न लेने में गांव के लोगों को सहूलियत होगी।