धनघटा विधानसभा से जीते भाजपा प्रत्याशी गणेश चंद्र चौहान।
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वर्ष 2017 विधानसभा चुनाव में 24 वर्ष अंतराल के बाद श्री राम चौहान ने धनघटा सीट पर भाजपा का वनवास खत्म कराया तो 2022 विधानसभा चुनाव में गणेश चंद चौहान ने कितनों के सपने की लंका को ढहाते हुए लगातार दूसरी बार भाजपा के कब्जा को बरकरार रखा।
अनुसूचित और पिछड़ी जाति बहुल सुरक्षित सीट धनघटा पर वर्ष 1991 में श्री राम चौहान भाजपा से चुनाव जीते थे। उसके बाद भाजपा व जदयू गठबंधन से शंखलाल माझी विधायक बने थे। उसके बाद लगातार वर्ष 2017 तक भाजपा का भगवा रंग इस सीट पर विराजमान नहीं हो सका था।
2017 में श्री राम चौहान जब यहां चुनाव लड़े, तो वह इस सीट को भाजपा के खाते में डालने में सफल हों गए। 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने श्री राम चौहान को यहां से हटाकर पड़ोसी जिला गोरखपुर के विधानसभा क्षेत्र खजनी भेज दी और उनके जगह पर सफाई कर्मी गणेश चंद चौहान को भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी बनाया।
गणेश चंद चौहान पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए सुरक्षित विधानसभा सीट धनघटा पर जीत दर्ज करते हुए विरोधियों के हौसलों को पस्त कर दिया। खासकर 2022 में बाईसिकल का नारा लगाने वाले सपा कार्यकर्ताओं के मंसूबे पर पानी फेर दिया। गणेश चंद चौहान ने यह साबित भी कर दिया कि सफाई कर्मचारी भी अपने मेहनत के दम पर प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंच सकता है।
गणेश चंद्र चौहान ने जहां सपा सुभासपा गठबंधन के प्रत्याशी अलगू प्रसाद चौहान को जहां भारी शिकस्त दी, वहीं बसपा कि हाथी को काफी मतों के अंतर से पीछे छोड़ दिया। गणेश चंद्र चौहान की सफलता पर राजनीति के जानकारों का कहना है कि यह जीत गणेश चंद चौहान के सरल स्वभाव की है। जाति पाति के भेदभाव को सर्व समाज के लोगों ने अपना वोट कमल को दिया। संवाद