- दुकानों पर बेधड़क बेची जा रही मिलावटी चाय की पत्ती
- पिछले साल नवंबर में पकड़ी गई नकली चाय, चल रहा केस
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। आपसे कोई मिलने आया हो या आप किसी से मिलने गए तो और कुछ हो न हो, कम से कम एक कप चाय तो जरूरी है, लेकिन यहां पर संभलने की जरूरत है। ऐसा इसलिए कि सामान्य व्यवहार का हिस्सा बन चुकी चाय भी धंधेबाजों की वजह से जहरीली होती जा रही है। यह हम नहीं कह रहे है यह खाद्य विभाग की रिपोर्ट बता रही है। खाद्य विभाग ने धनघटा में नकली चाय पकड़ी थी। जिसका केस सीएजेएम न्यायालय में चल रहा है।
खलीलाबाद से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बेधड़क खुली चाय की पत्ती बेची जा रही है। यह देखने में पूरी तरह से असली चाय की पत्ती की तरह दिखती है, लेकिन यह मिलावटी होती है। वैसे ब्रांडेड चाय की पत्ती पर लोग ज्यादा जोर देते हैं, लेकिन सस्ती चाय की पत्ती के चक्कर में लोग इसे खरीद रहे हैं। शहर के कई दुकानों पर खुले में चाय की पत्ती बेची जा रही है। चाय की पत्ती 90 रुपये प्रति किलो से 120 रुपये किलो तक है। दुकानदार इसे तौलकर पाॅलीथीन में बांध दे रहे हैं और फुटकर चाय की दुकानों पर इसे डिब्बे में रख दिया जाता है। इससे सेहत पर प्रभाव पड़ता है।
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जिले में पकड़ी गई है मिलावटी चाय की पत्ती
खाद्य व औषधि प्रशासन ने बीते साल नवंबर माह में धनघटा में एक दुकान पर छापा मारा था। जहां से 50 किलो चाय की पत्ती बरामद हुई थी। उसे जांच के लिए लैब भेजा गया। जिसमें रंग की मिलावट पाई गई। इस मामले में आरोपी पर सीजेएम कोर्ट में केस चल रहा है। अप्रैल माह में खाद्य विभाग ने खलीलाबाद से चाय की पत्ती का नमूना लिया था। नमूने में कोई गडबड़ी नहीं मिली लेकिन रैपर संदिग्ध मिला था। जिस पर जुर्माने की कार्रवाई चल रही है।
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कैसे करें नकली चायपत्ती की पहचान
- ठंडे पानी में चायपत्ती को डाल दें, अगर वह रंग छोड़ता है तो नकली है और केमिकल मिला है।
- चायपत्ती अगर नकली होगी तो उसमें सुगंध नहीं आएगी।
- अगर चायपत्ती ठंडे पानी में डालते नीचे बैठ जाती है तो वह मिलावटी है। अगर ऊपर है तो सही है।
बोले व्यापारी
नकली चाय की पत्ती कुछ दुकानदार बेच रहे हैं जिससे अन्य भी बदनाम हो रहे हैं। ग्राहक खुली चाय की पत्ती खरीदते समय उसकी गुणवत्ता की जांच कर लें, उसके बाद ही खरीदें।
- महेश गुप्त, व्यापारी
खाद्य विभाग को समय-समय पर अभियान चलाना चाहिए ताकि जो खराब चायपत्ती बेच रहे हैं, उन पर कार्रवाई हो सके। इसमें व्यापारी पूरा सहयोग करेंगे।
- सर्वदानंद पांडेय, अध्यक्ष, पूर्वांचल व्यापार मंडल
केमिकल मिली चायपत्ती से लिवर पर असर
जिला अस्पताल के फिजीशियन डाॅ. एपी मिश्र ने बताया कि चायपत्ती हमेशा ब्रांडेड ही इस्तेमाल करना चाहिए। केमिकल मिली चाय की पत्ती से लिवर पर असर पड़ता है। साथ ही गैस की समस्या बनती है। केमिकल युक्त चाय पीने से शरीर के किसी भी अंग को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए चाय की पत्ती का इस्तेमाल करते समय उसकी गुणवत्ता की जांच जरूर कर लें।
पिछले साल नवंबर माह में धनघटा में चायपत्ती का नमूना लिया गया था। लैब में जांच हुई तो उसमें केमिकल मिला पाया गया। इसमें सीजेएम न्यायालय में दुकानदार पर केस चल रहा है। अप्रैल माह में भी चाय की पत्ती का नमूना लियागया था, उसके रैपर संदिग्ध हैं। इसमें जुर्माने की कार्रवाई चल रही है।
- जेपी तिवारी, जिला अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन