संतकबीरनगर। हर सप्ताह खलीलाबाद में लगने वाली बरदहिया बाजार में दो दिन में 120 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। सहालग और ठंड के चलते बरदहिया बाजार की रौनक अलग दिखती है। स्थिति यह है कि सहालग के कपड़े गोरखपुर की थोक बाजार से 15 प्रतिशत कम मूल्य में बिकते हैं। उसका परिणाम है कि गोरखपुर के थोक व्यापारी भी बरदहिया बाजार में दो दिन कारोबार करने के लिए जरूर आते हैं।
शुक्रवार की रात से रविवार की सुबह तक चलने वाली बरदहिया बाजार में दूर-दूर से थोक व्यापारी आते हैं। इस बाजार में लुधियाना, सीतापुर, गोरखपुर के साथ ही स्थानीय थोक व्यापारियों की संख्या काफी अधिक है। व्यापार मंडल के श्रवण अग्रहरि का मानना है कि छोटे बड़े तकरीबन 5 हजार व्यापारी इस समय बरदहिया बाजार में व्यापार से जुड़े हैं । यहां तकरीबन 120 करोड़ से अधिक का कारोबार यहां पर होता है। चूंकि इस बाजार में लुधियाना, दिल्ली और पानीपत तक के व्यापारी आते हैं, इसलिए गोरखपुर के थोक व्यापारियों को भी यह बाजार काफी लुभाती है।
गोरखपुर के थोक व्यापारी बाहर से आने वाले व्यापारियों से भी माल खरीदकर ले जाते हैं और गोरखपुर के थोक बाजार में बेचते हैं। यहां पर गोरखपुर से तकरीबन 300 व्यापारी आते हैं। किसी ने यहां पर शेड लिया है तो कोई चौकी लगाकर अपने कपड़ों को रखता है। कई व्यापारियों ने तो तीन दिन के लिए यहां शो रूम भी ले लिया है। उनका माल बाहर से आता है और वह ट्रांसपोर्ट से व्यापार स्थल पर ले जाकर थोक में बेचते हैं। वहीं गोरखपुर के कुछ व्यापारी अपना माल लेकर आते हैं और यहां से सामान बेचकर बाकी सामान लेकर चले जाते हैं।
स्थानीय स्तर पर जिले के ढाई सौ से अधिक बुनकर भी अपने माल लेकर आते हैं और सामान बेचकर आढ़तियों से धागा लेकर चले जाते हैं तथा उसी धागे से माल तैयार करके अगली बाजार में फिर माल बनाकर ले आते हैं। इनके अधिकतर खरीदार वही व्यापारी होते हैं जो सीतापुर, लुधियाना, दिल्ली और अन्य स्थानों से आते हैं। वह यहां से अपना माल बेचकर सूती कपड़े खरीदकर ले जाते हैं। ऊनी बाबा शूट और लेडिज कार्डिगन, सलवार कमीज के साथ ही अन्य सामानों की भी खरीद फरोख्त पौली, मुखलिसपुर, महुली तथा अन्य स्थानों के कारीगर आठ महीनों में बनाए गए अपने माल को लेकर आते हैं और बेचते हैं। इसके साथ ही आढ़तियों से माल बनाने के लिए ऊनी कपड़ों के बंडल भी ले जाते हैं तथा उनके कपड़े बनाते हैं।
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सहालग के सीजन को लेकर थोक व्यापारी भी उत्साहित
हम यहां तीन दिन रहते हैं। सहालग के सीजन को लेकर लोग हमारे यहां खरीदारी करने के लिए आते हैं। यहां पर 1200 रुपये से लेकर 10000 रुपये तक के लहंगे हैं। वहीं 70 रुपये से लेकर 4000 रुपये तक की साड़ियां मिलती हैं। सहालग में कारोबार बढ़ा है। - अमन गुप्ता, गोरखपुर, व्यापारी
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गोरखपुर से हम शुक्रवार को माल लेकर आ जाते हैं। यहां पर सजाते हैं और थोक व्यापारियों को बेचते हैं। हमारे यहां बेगूसराय, हाजीपुर, पटना और नेपाल तक के व्यापारी आते हैं और अपनी सुविधा के हिसाब से ले जाते हैं। रविवार को हम वापस चले जाते हैं। -महादेव शर्मा, गोरखपुर, व्यापारी
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सहालग के समय में लोग देने के लिए कंबलों की खरीदारी अधिक करते हैं। साथ ही रजाई की गर्म खोल भी लोग ले जाते हैं। यहां पर थोक भाव में 260 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक के कंबल मिलते हैं। वर्तमान समय में फैंसी कंबलों की बिक्री काफी अच्छी हो रही है। -हफीज खान, सीतापुर, व्यापारी
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हमारी दुकान यहां पर दो दिनों तक चलती है। यहां पर हमने एक अच्छा शो रूम भी बना रखा है। ताकि यहां पर आने वाले व्यापारियों को माल का चयन करने में कोई दिक्कत न हो। कारोबार अच्छा है। सहालग के कपड़े यहां पर खूब बिक रहे हैं। मूल्य भी किफायती है। -बिहारीलाल गुप्ता, गोरखपुर, व्यापारी
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कंबल, रजाई के साथ ही साथ दरी और खोल का कारोबार है। बाहर के व्यापारियों में हमारे यहां मोकामा, बेतिया, बगहा, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली तक के व्यापारी खरीदारी के लिलए आते हैं। कारोबार बेहतर चल रहा है। 100 रुपये से लेकर 4000 तक के कंबल व दरियां हैं। -वकील अहमद, खलीलाबाद, व्यापारी
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वकील अहमद, थोक व्यापारी- फोटो : सांकेतिक
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वकील अहमद, थोक व्यापारी- फोटो : सांकेतिक
वकील अहमद, थोक व्यापारी- फोटो : सांकेतिक
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वकील अहमद, थोक व्यापारी- फोटो : सांकेतिक