नहीं खुलते आंगनबाड़ी केंद्र, पोषाहार का पता नहीं
जांच में 12 आंगनबाड़ी केंद्रों पर लटक रहे थे ताले
- केंद्रों पर फैली गंदगी और टूटे दरवाजें बयां कर रहे थे दुर्दशा की कहानी
अमर उजाला ब्यूरो
सांथा/संतकबीरनगर। विकास खंड़ सांथा में आंगनबाड़ी केंद्र की हालत दयनीय है। 215 केंद्रों में सिर्फ 75 के पास खुद का भवन है। शेष केंद्र परिषदीय स्कूलों में संचालित होना बताया गया। संवाद प्रतिनिधि ने 12 केंद्रों की जांच की तो सभी केंद्र बंद मिले। ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र लंबे समय से नहीं खुल रहे हैं। कई केंद्रों पर तो कार्यकर्ता और सहायिका के बारे में ग्रामीणों को कोई जानकारी हीं नही है। पोषाहार का वितरण कब, किसकों और कहां किया जाता है, इसकी भी जानकारी उन्हें नहीं है। केंद्रों पर फैली गंदगी और टूटे दरवाजे दुर्दशा की कहानी बयां कर रहे थे।
ग्राम पंचायत लोहरसन में सात आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। जिसमें चार मिनी आंगनबाड़ी केंद्र व तीन आंगनबाड़ी केंद्र खुद के भवन में संचालित होता हैं। मौके पर सातों केंद्रों पर ताला लटका था। आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि केंद्र काफी समय से बंद है। केंद्र पर गंदगी देखकर यही लग रहा था कि लंबे समय से केंद्र नहीं खुले हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कागज में केंद्र भले ही चल रहे हैं, लेकिन वास्तवित स्थिति कुछ और ही है। पोषाहार का वितरण कब किया जाता है, यह किसी को पता नहीं है।
आंगनबाड़ी केंद्र करनजोत की हालत काफी दयनीय मिली। यहां केंद्र के चारों तरफ झाड़ झंखाड़ उगे हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र का संचालन कई माह से ठप है। कभी केंद्र का संचालन इस भवन में होते नहीं देखा गया। वैसे तो केंद्र का भवन नया है। पूर्व ग्राम प्रधान ने बताया कि केंद्र पर कार्यकर्ता के रूप में जहीदुनिशा तैनात हैं। केंद्र गांव से बाहर बना है, जहां हर बरसात में जलभराव की समस्या रहती है। ग्राम पंचायत मुड़िलाकलां में स्थापित आंगनबाड़ी केंद्र खुद के भवन में संचालित हो रहा है, लेकिन यह केंद्र भी लंबे समय से बंद है। केंद्र की बदहाली खुद हकीकत बयां कर रही है। केंद्र के दरवाजे नहीं है। चारों तरफ गंदगी है। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से केंद्र का संचालन नहीं हो रहा है। यहां कौन तैनात है, यह भी ग्रामीणों को पता नहीं है। ग्राम पंचायत कोइलभार में खुद का आंगनबाड़ी केंद्र का भवन जर्जर है। नया केंद्र प्राथमिक विद्यालय के बगल में बना है, लेकिन केंद्र संचालित होते नहीं पाया गया। यहां तैनात कार्यकर्ता प्रमिला के बारे में ग्रामीणों ने बताया कि उनकी डिलेवरी कुछ समय पूर्व हुई है। बच्चे की तबीयत खराब होने के कारण दिखाने गई हैं, लेकिन केंद्र पर तैनात सहायिका नजर नहीं आई। ग्रामीण राकेश कुमार, हकीकुल्लाह और अकरम आदि ने बताया कि कार्यकर्ता की डिलेवरी होने के बाद से ही केंद्र का संचालन बंद है।
215 केंद्र में 21 हजार बच्चों का नामांकन : सीडीपीओ
प्रभारी सीडीपीओ मधु चतुर्वेदी ने बताया कि विकास खंड क्षेत्र में कुल 215 केंद्र संचालित हैं। जिनमें करीब 75 केंद्र खुद के भवन में संचालित हो रहा है। जबकि शेष परिषदीय विद्यालय के भवन में चल रहा है। 42 केंद्रों पर कार्यकर्ता व सहायिका का पद रिक्त है। रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रियाधीन है। सीडीपीओ का पद रिक्त है। उनके पास सीडीपीओ का प्रभार है। शासन की मंशा के अनुसार केंद्र संचालित कराए जाने की व्यवस्था के तहत औचक निरीक्षण भी किया जा रहा है। कुछ केंद्र संचालित न होने का मामला संज्ञान में है। जिससे समस्या आ रही है। जल्द ही इन केंद्रों को सुचारु रूप से संचालित कराए जाने का प्रयास किया जाएगा।
इंसेट
आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन ठीक से नहीं होना उचित नहीं है। विभाग के जिम्मेदार डीपीओ, सीडीपीओ और मुख्य सेविका का दायित्व है कि वे नियमित रूप से केंद्रों की जांच कर उसके सफल संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। यदि केंद्र कागजों में चल रहा है और उसके पोषाहार का गलत तरीके से वितरण किया जाना दर्शाया जा रहा है तो यह स्थिति गंभीर है। संबंधित जिम्मेदारों से सवाल-जवाब किया जाएगा। एसडीएम, बीडीओ और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के जरिए भी समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच कराई जाएगी।
दिव्या मित्तल, डीएम