तहसील भवन में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। परिसर में बने शौचालयों पर ताला लटका हुआ है या जर्जर हालत में हैं। ऐसे में वादकारियों और अधिवक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। जबकि इस मामले में कई बार अधिवक्ता गण अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर समस्या समाधान की मांग कर चुके हैं।
तहसील चंदौसी के मुख्यालय भवन को बने लगभग दो दशक से ज्यादा का समय हो गया है। वर्ष 1989 में चंदौसी तहसील की घोषणा हुई थी। घोषणा के लगभग 10 साल बाद वर्ष 2000 में असालतपुर जारई रोड पर तहसील मुख्यालय का निर्माण हुआ था। तब से ही तहसील चंदौसी का कार्यालय व न्यायालय इसी भवन से संचालित किए जा रहे हैं। उप जिलाधिकारी के अतिरिक्त उप निबंधक कार्यालय व चकबंदी के न्यायालय भी संचालित हैं। तीन मंजिला तहसील भवन में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। शौचालय को समय-समय पर शासन की योजनाएं आती रहीं। नये शौचालयों का निर्माण कराया गया लेकिन कोई भी शौचालय शौचालय कार्यशील नहीं है। जिससे वादकारियों और अधिवक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खास तौर पर महिला वादकारी व महिला अधिवक्ताओं को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ये है शौचालयों का हाल
तहसील भवन की तीन मंजिला इमारत में कई शौचालय बने हैं। जिसमें ग्राउंड फ्लोर पर बना शौचालय खुला हुआ है लेकिन पाइप टूटे हैं और पानी की व्यवस्था नहीं है। दूसरी और तीसरी मंजिल पर शौचालयों में ताले लटके हैं। इसके अलावा उप निबंधक कार्यालय के पास श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड मुरादाबाद की ओर से बना छह सीट शौचालय व स्नान घर जर्जर हो गया है। दरवाजे भी गायब हैं। गंदगी पसरी हुई है। तहसील के गेट नंबर दो पर बने शौचालय पर ताला लगा है। वह भी पार्किंग स्थल बना हुआ है।
वर्जन
- तहसील परिसर में शौचालय तो कई हैं, कुछ में ताला लटका है तो बाकी जर्जर हो चुके हैं। जिससे वादकारियों और अधिवक्ताओं को परेशानी होती है
- छत्रपाल सिंह यादव, अधिवक्ता चंदौसी
- तहसील में शौचालय की समस्या अहम है। शौचालय संचालित न होने से महिलाओं को खास तौर पर परेशान होना पड़ता है
- गिरिराज किशोर, अधिवक्ता चंदौसी
-तहसील में शौचालय की समस्या दूर करने के लिए कई बार अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए गए थे लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला।
-उमेश कुमार सिंह, अधिवक्ता चंदौसी
- शौचालय बंद व जर्जर होने के कारण लोगों को जहां तहां भटकना पड़ता है। जल्दी ही समस्या का समाधान कराया जाना आवश्यक है।
-अवनेश चौहान, अधिवक्ता चंदौसी