दोनों बच्चियों की हालत बिगड़ते देख, तीसरी बहन के पिता ने भी उसे चिकित्सकों को दिखाने के बाद चंदौसी के एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया था। शाम को उसे मुरादाबाद रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पांच घंटे के अंदर तीनों बच्चियों की मौत से पूरे गांव में कोहराम मच गया है। परिजनों का भी रोते रोते बुरा हाल है।
मृतक बच्चियों में से एक की मां ने बताया कि परछाय नाम का एक पेड़ होता है, जिसके पत्तों को चोट लगने पर बांधा जाता है, ताकि किसी को सेप्टिक न हो। तीनों बच्चियां खेत में खेलने के दौरान उसी के फल की सब्जी बना ली थी। उसी जगह पर जमीन में मधुमक्खी पालन करने वालों ने चीटियों को मारने के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाई को दबाकर रखा था, जिसे संभवत: बच्चियों ने सब्जी में मिला दिया। उसी सब्जी को खाने के कारण बच्चियों के शरीर में जहर फैल गया।