संभल। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जिलाधिकारी के आदेश पर नौ और दस मई को जिलेभर में झोलाछाप के खिलाफ अभियान चलाया था। इसमें 43 क्लीनिक व नर्सिंग होम संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का दावा किया गया। रिपोर्ट दर्ज कराने के ज्यादातर मामलों में खेल किया गया है। मेडिकल एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई कराई गई है। जबकि नियमानुसार आरोपियों पर मेडिकल एक्ट के अलावा धोखाधड़ी की भी कार्रवाई की जानी थी। बड़े स्तर पर चले अभियान के अंतर्गत कार्रवाई औपचारिक रही। जबकि जिलेभर में दो हजार से ज्यादा अवैध नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालित होते हैं।
ग्रामीण इलाके के अलावा शहरी क्षेत्र में अवैध नर्सिंग होम और क्लीनिक की भरमार है। नोडल अधिकारी डा. मनोज चौधरी ने बताया कि उन्होंने 17 जगह छापेमारी की थी। इसमें दस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मेडिकल एक्ट के अलावा धोखाधड़ी का भी आरोपी बनाया गया है। बताया कि ऐसी जानकारी मेरे संज्ञान में आई है कि कुछ रिपोर्ट में केवल मेडिकल एक्ट के अंतर्गत ही कार्रवाई कराई गई है जबकि नियमानुसार धोखाधड़ी की भी कार्रवाई की जानी थी। जहां भी केवल मेडिकल एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई हुई है वहां की जांच कराएंगे और नियमानुसार कार्रवाई होगी। सवाल उठता है कि जब टीमों को जिलाधिकारी ने आदेश किए थे तो कार्रवाई के दौरान खेल कैसे कर दिया गया। 43 अवैध क्लीनिक और नर्सिंग होम के खिलाफ भी कार्रवाई का टीमें दावा कर रही हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में ऐसा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, जिसमें 43 के खिलाफ कार्रवाई होने की पुष्टि की जा सके।
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कोट
ऐसी जानकारी संज्ञान में आई है कि कुछ जगह केवल मेडिकल एक्ट के अंतर्गत ही कार्रवाई हुई है। धोखाधड़ी के अंतर्गत कार्रवाई नहीं कराई गई। ऐसा भी हो सकता है कि जानकारी के अभाव में ऐसी कार्रवाई हो गई हो। ऐसी सभी जगह की जांच कराई जाएगी। नियमानुसार कार्रवाई होगी।
डा. मनोज चौधरी, नोडल अधिकारी, संभल।