चंदौसी। यूक्रेन के ओडेशा से अपने साथियों के साथ भारत के लिए निकले गुन्नौर के जुनावई निवासी सम्राट यादव ने बताया कि माल्दोवा बॉर्डर पर कोई सुविधा नहीं मिली। भारतीय एंबेसी के अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे हैं। बस ने बॉर्डर से दो किलोमीटर दूर छोड़ दिया था। बॉर्डर पार करने के बाद स्थानीय व यूएन के लोगों ने खाने की व्यवस्था की।
सम्राट यादव ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि उन्होंने पोलैंड व बॉर्डर जाने के लिए एंबेसी से संपर्क किया, पर कोई जबाव नहीं मिला। भय के बीच स्वयं बस की व्यवस्था कर अपने 40 साथियों के साथ शुक्रवार की दोपहर डेढ़ बजे माल्दोवा बॉर्डर की ओर कूच किया। करीब ढाई घंटे में 150 किलोमीटर का सफर करने के माल्दोवा बार्डर के पास पहुंचे। वहां बस चालक ने दो किलोमीटर दूर छोड़ दिया। वहां से सभी साथी पैदल ही बॉर्डर पर पहुंचे। भारतीय एंबेसी से संपर्क करने का प्रयास किया, पर कोई सफलता नहीं मिली। बॉर्डर पर कोई भी भारतीय अधिकारी नहीं मिला। बॉर्डर पर लंबी लाइन लगी थी। चार घंटे लाइन में लगकर माल्दोवा की सीमा में प्रवेश किया। खाने की सामग्री नहीं थी। बताया कि माल्दोवा बॉर्डर क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने खाने की व्यवस्था। वहां अन्य भारतीय भी मिल गए। अब समूह में करीब 70 लोग हो गए हैं। यहां से रोमानिया जाने का योजना बनाई है। एक साथ रोमानिया अधिकारियों के संपर्क में है। उसकी सूचना मिलने पर सभी मोल्दोवा बॉर्डर से 600 किलोमीटर का सफर तय करने के लिए रवाना होंगे। सरकार की ओर से सुविधा न मिलने से मन दुखी है।