चंदौसी (संभल), बरेली से अलीगढ़ जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में खाने-पीने का सामान बेच रहा सफी अहमद (45) बोगी में सिपाही नजर आने पर कार्रवाई के डर से बाहर कूदने लगा। कूदते समय दरवाजे के पास खड़े यात्रियों ने उसके हाथ पकड़ लिए, जिससे वह लटक गया और करीब छह किमी घिसटता चला गया। इस हादसे में उसके दोनों पैर बुरी तरह घायल हो गए।
सीएचसी में उसने बताया कि वह रामपुर के शाहबाद क्षेत्र के गांव मधुकर का रहने वाला है। ट्रेन में चने-मूंगफली बेचता है। रविवार को ट्रेन सिसरका स्टेशन से छूटी तो उसे बोगी में सिपाही नजर आए। वेंडर का लाइसेंस न होने के कारण डर से वह बाहर कूदा लेकिन दो यात्रियों ने उसके हाथ पकड़ लिए। बाद में एक सिपाही ने भी हाथ पकड़कर उसे खींचने की कोशिश की लेकिन बोगी के भीतर तक नहीं ला सके।
कुछ देर बाद किसी यात्री ने चेन खींची लेकिन ट्रेन रुकते-रुकते छह किमी दूर चंदौसी आउटर तक पहुंच गई। चंदौसी में सिग्नल से सौ मीटर दूर ट्रेन रुक गई। तब तक लटके हुए घिसटने से उसके कपड़े फट गए और दोनों पैर बुरी तरह जख्मी हो गए। इसके बाद उसे आरपीएफ और जीआरपी ने घायल अवस्था में सीएचसी पहुंचाया। चंदौसी सीएचसी में प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
घटना के समय उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। ट्रेन में आरपीएफ स्टाफ को देखते ही वह कूद पड़ा। बचाने के लिए आरपीएफ के सिपाही और यात्रियों ने उसे पकड़ लिया। ट्रेन रुकने तक घिसटने से उसके पैरों में चोटें लगी हैं।
- देवीदयाल, सीओ जीआरपी, मुरादाबाद
छह माह से लाइसेंस के लिए काट रहा चक्कर
घायल सफी अहमद ने चंदौसी सीएचसी में बताया कि वह ई-रिक्शा चलाता था। कुछ माह पहले बैटरी खराब हो गई। नई बैटरी के लिए पैसे न होने के कारण ई-रिक्शा खड़ा हो गया। घर चलाने के लिए ट्रेनों में खाने-पीने का सामन बेचने लगा। रेल वेंडर का लाइसेंस मिल जाए, इसके लिए छह माह से मुरादाबाद में रेलवे दफ्तर के चक्कर काट रहा है। अभी लाइसेंस नहीं बन सका है।