बहजोई। जिले में ऑपरेशन कायाकल्प योजना फाइल, बैठक व आदेश तक ही सिमटकर रह गई है। कुल 1289 परिषदीय विद्यालयों में से मात्र 148 विद्यालयों में ही योजना के तहत कार्य कराया जा रहा है। अफसरों की लापरवाही के चलते ऑपरेशन कायाकल्प योजना धरातल पर आकर दम तोड़ रही है। इससे विद्यालय के सुंदरीकरण को लेकर शासन की मंशा को भी करारा झटका लग रहा है।
बीते माह जून 2018 से प्रारंभ हुई ऑपरेशन कायाकल्प योजना के क्रियान्वयन को लेकर सरकार व शासन से लेकर जिला स्तर पर भी काफी प्रचार-प्रसार किया गया था। इसको लेकर जिला स्तर पर योजना को धरातल पर लाने के लिए अभिलेख जुटाते हुए अफसरों की बैठक भी हुईं और मातहतों को योजना के तेजी से क्रियान्वयन के लिए आदेश भी जारी किए गए। बावजूद इसके बीते तीन वर्षों में ऑपरेशन कायाकल्प योजना धरातल पर पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ रही है। अफसरों की लापरवाही से योजना कई विकास खंडों व नगर क्षेत्र में पिछड़ रही है।
जिले में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत कुल 1289 परिषदीय विद्यालयों में 18 पैरामीटर्स को ध्यान में रखते हुए सुंदरीकरण कराया जाना है। इसके लिए विकासखंड क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में ग्राम निधि व मनरेगा से तथा नगर क्षेत्र में नगर पालिका परिषद की ओर से विद्यालयों में टाइलीकरण व बालक व बालिकाओं के अलग-अलग शौचालय व यूरिनल समेत अन्य कई कार्य कराए जाने हैं।
बीते कई माह से ऑपरेशन कायाकल्प योजना को गति देने के लिए लगातार जिले में अभिलेख तैयार किए जाने समेत जिला प्रशासन व संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकें की जा रही हैं।
जिला प्रशासन की ओर से अफसरों को योजना के तहत विद्यालयों में सुंदरीकरण का कार्य कराए जाने के आदेश भी जारी किए जा रहे हैं, लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते योजना का क्रियान्वयन जस से तस बना हुआ है। कुल 1289 परिषदीय विद्यालयों में से 148 विद्यालयों में ही योजना के तहत कार्य कराया जा रहा है।