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संभल कवि सम्मेलन: कहां गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे...सुन जमकर बजी तालियां, उमंग और उत्साह की तस्वीरें

Sat, 01 Mar 2025 01:05 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल

सार

संभल में अमर उजाला द्वारा आयोजित सद्भावना कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में देशभर के प्रसिद्ध कवि और शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर समां बांध दिया। नवाज देवबंदी, नीलोत्पल मृणाल, मुमताज नसीम समेत कई कवियों और शायरों की रचनाओं पर देर रात तक तालियां गूंजती रहीं।
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संभल में कवि सम्मेलन - फोटो : संवाद
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विस्तार
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संभल के दुर्गा कॉलोनी स्थित विक्रम पैलेस में शुक्रवार की शाम सद्भावना कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की महफिल सजी। इसमें देश के कई नामचीन कवि और शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। हास्य कवियों की प्रस्तुति से लोगों के चेहरे पर ऐसी मुस्कान बिखरी, जो कार्यक्रम के अंत तक नहीं बनी रही। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

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संभल में कवि सम्मेलन - फोटो : संवाद
इस दौरान सहयोगियों को सम्मानित भी किया गया। अमर उजाला और कॉन्टिनेंटल सीड्स एंड केमिकल्स लिमिटेड द्वारा यह कवि सम्मेलन एवं मुशायरा आयोजित किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया शामिल रहे। इनके अलावा एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई व आचार्य प्रमोद कृष्णम की भी उपस्थिति रही। कवि नीलोत्पल मृणाल ने काव्य पाठ से समां बांध दिया।

संभल में कवि सम्मेलन - फोटो : संवाद
उन्होंने बीते दिनों को याद करते हुए अपनी रचना सुनाई... हाय मेरा दिन वो सलोना रे, दिन वो सलोना रे। हाथों में था मेरे माटी का खिलौना रे। वही मेरा चांदी था वही सोना रे, कहां गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे, दिन वो सलोना रे। वहीं, स्वयं श्रीवास्तव ने कहा एक शख्स क्या गया, कि पूरा काफिला गया। तूफ़ां था तेज, पेड़ को जड़ से हिला गया। जब सल्तनत से दिल की ही रानी चली गई, फिर क्या मलाल तख्त गया या किला गया। 

संभल में कवि सम्मेलन - फोटो : संवाद
इसके बाद आईं शायरा मुमताज नसीम ने कहा कि प्यार की खुशबुओं का समंदर हूं मैं, मुस्कुराता हुआ शोख मंजर हूं मैं। जानती हूं के तू मेरी तकदीर है, मान भी जा के तेरा मुकद्दर हूं मैं। बनके बादल जो मुझ पर बरस जाओगे, क्या खबर थी कि नस-नस में बस जाओगे। आज मौका है जी भर के तुम देख लो, देखने को वरना तरस जाओगे। इन कवि व शायर की प्रस्तुति से बैंक्वेट हॉल तालियों की गूंज उठा। हास्य कवि अखिलेश द्विवेदी, विकास बौखल की प्रस्तुतियों से लोग खिलखिला उठे। 

संभल में कवि सम्मेलन - फोटो : संवाद
कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की अध्यक्षता करते हुए शायर नवाज देवबंदी ने सुनाया कि मोहब्बत के चरागों को जो आंधियों से डराते हैं, उन्हें जाकर बता देना हम जुगनू बनाते हैं। ये दुनिया दो किनारों को कभी मिलने नहीं देती, चलो दोनों चलकर किसी दरिया पर पुल बनाते हैं। देर रात तक इन कवि व शायर ने समां बांध दिया। संचालन कवि स्वयं श्रीवास्तव ने किया।

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यह रहे सहयोगी
कॉन्टिनेंटल सीड्स एंड केमिकल्स लिमिटेड संभल, नगर पालिका परिषद संभल, इंडिया फ्रोजन फूड संभल, पूनिया डेंटल केयर एवं नर्सिंग होम व विक्रम पैलेस, राजीव इलेक्ट्राॅनिक्स संभल, संजीवनी अस्पताल संभल, सुरेश कुमार वर्मा क्षेत्र पंचायत सदस्य/पूर्व ग्राम प्रधान ऐंचोड़ा कंबोह (असमोली), नईमुल हसन उर्फ लड्डन मियां वरिष्ठ सपा नेता व समाजसेवी, नगर पंचायत नरौली, दर्दमंद बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, कुमार आभूषण भंडार बाजार ठेर संभल, हाजी नुसरत इलाही पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका संभल, प्रदीप कुमार गुप्ता एडवोकेट, ईंट निर्माता समिति संभल, दून मॉर्डन पब्लिक स्कूल संभल, कौसर अब्बास, चेयरमैन नगर पंचायत सिरसी।

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यह रहे माैजूद
इस दौरान डॉ. अरविंद गुप्ता, राजकुमार शर्मा, मुकेश शर्मा, दीपक गुप्ता, अजय शर्मा, निशिकांत तिवारी, कमलकांत तिवारी, प्रदीप कुमार गुप्ता, अजय सिंघल, संतोष गुप्ता, सईद अख्तर, तरन्नुम अकील, अमित शुक्ला, मीना बेगम, मनोज रस्तोगी, आदित्यवीर रस्तोगी, शिल्पी गुप्ता, शानू खान, प्रभाकर शुक्ला, ताहिर सलामी, सुहेल परवेज, कमल कौशल वार्ष्णेय, डॉ. नाजिम, नरेंद्र अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, सुधीर गर्ग, शिवकुमार शर्मा, डॉ. नीरज शर्मा, संजय सांख्यधर, विकास वर्मा, नाजिर हुसैन, नीरज बजाज, सुरजीत कौशिक, संजीव शुक्ला, उमेश कुमार, जव्वाद, अंकुर त्यागी आदि मौजूद रहे।

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प्रेम बदला न भावनाएं, सिर्फ शब्दों में अंतर : नीलोत्पल
हमारे समाज में नई और पुरानी चीजों को लेकर एक महीन भ्रम है। प्रेम को भी लोग इसी पैमाने पर ताैलते हैं। मैं कहूंगा कि न तो प्रेम बदला है और न भावनाएं। बदल गए हैं तो सिर्फ शब्द और प्रेम की अभिव्यक्ति का तरीका। यह शब्द अपनी कविता से युवाओं में प्रसिद्धि पा चुके रचनाकार नीलोत्पल मृणाल के हैं। मृणाल कहते हैं कि अभी तो हम देवदास देखकर तालियां बजा कर उठे हैं। इतना समय नहीं हुआ की प्रेम में परिवर्तन आ जाए।

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फिल्मों के गीतों का प्रभाव जरूर कम हुआ है। आज गीतों में रचनाकार उतने अच्छे शब्दों का चयन नहीं कर रहे हैं। हिंदी के कवियों के पास 30 साल पुराने गीत हैं। ऐसा नहीं है कि नया सृजन नहीं कर सकते लेकिन सोच में नवाचार लाना बड़ा श्रम मालूम होता है। नए दौर के प्रेम पर उन्होंने कहा कि आज समाज में तलाक नहीं बल्कि ब्रेकअप बड़ी घटना है।

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