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धन दौलत की दौड़ में, भूल गए संतोष क्यों......

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बहजोई। संस्कार भारती के तत्वावधान में बृहस्पतिवार की रात कुम्हारान मोहल्ला में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सर्वप्रथम वंदना वार्ष्णेय ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी।
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मुरादाबाद से आए कवि राजीव प्रखर ने 'सारे जग में देश का, बढ़ा रही हैं मान, आगे-आगे बेटियां, पीछे हिंदुस्तान' की प्रस्तुति की, तो चंदौसी से आए कवि रमेश 'अधीर ने धन दौलत की दौड़ में, भूल गए संतोष क्यों, रहना है जब सब यहीं, करें इकट्ठा कोष क्यों' सुनाकर श्रोताओं का रुपये प्रति मोह भंग करने का प्रयास किया। कवि दीपक गोस्वामी चिराग ने चिड़ियाघर में कैद जानवरों पर 'मजे से देखते हो तुम हमारी कैद को लोगों, तुम्हारे शौक की कीमत हमारी जिंदगानी है'। वयोवृद्घ कवि रूप किशोर गुप्ता ने 'पास पैसा था जब तलक उसके, सबके हाथों छली गई अम्मा, कोई बेटा न पास आया, राह तकते चली गई अम्मा' सुनाया, कवियित्री वार्ष्णेय ने 'यह तो है धरती सम माता, अमिट प्यार जो करती है, यह तो है गंगा सम पावन, अमृत रस जो भरती है' सुनाकर श्रोताओं को मंत्र-मुग्ध कर दिया। बिल्सी से आए वरिष्ठ कवि नरेंद्र गरल ने 'श्रम की माला जपता चल, तू खुद अपना दीपक बन जा, और उजाला करता चल' सुनाया। अंत में कवियों तथा अतिथियों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार, लेखिका मंजुल गोयल ने की। अध्यक्ष अनिल कुमार समेत हरिओम रुहेला, सोम प्रकाश वार्ष्णेय, नरेश कुमार दीपेंद्र आर्य, राममूर्ति नाथ,जय कुमारी, शिखा गुप्ता, ज्योत्सना वार्ष्णेय, मंजू अग्रवाल, विमला देवी, सुशीला देवी, दीपेंद्र आर्य आदि लोग उपस्थित रहे।
बहजोई। कुम्हारान मोहल्ला में संस्कार भारती बहजोई के तत्वाधान में वरिष्ठ कवि रमेश अधीर की ओर से रचित काव्य संग्रह "और क्या हैं आप" का विमोचन भी किया गया। प्रांतीय संरक्षक रूप किशोर गुप्ता समेत दीपक गोस्वामी चिराग, नरेंद्र गरल व शिवदत्त संदल की ओर से कवि रमेश अधीर की कृति "और क्या हैं आप" का विमोचन किया गया।
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