चंदौसी/बहजोई। रूस की सैन्य कार्रवाई के बीच यूक्रेन के टर्नोपिल शहर में बहजोई निवासी आयुषी वार्ष्णेय भी फंसी हुई है। टर्नोपिल से आयुषी ने बताया कि वह अपने हास्टल के 150 छात्रों के साथ पिछले 16 घंटे से बेसमेंट में थी। लड़ाकू विमान-हेलीकाप्टर के सायरन के अलावा कुछ सुनाई नहीं दे रहा है। खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ड्राई फ्रूट और बिस्कुट पर निर्भर है। भारतीय समयानुसार शाम सात बजे बंकर से निकालकर छात्रावास भेजा गया है। सैन्य कार्रवाई से सभी के अंदर भय का माहौल है और सभी घर जाना चाहते हैं। बताया कि उसके साथ बदायूं के चिकित्सक की बेटी मुहिता भी है।
बहजोई के भाजपा नेता रजनीश वार्ष्णेय की बेटी आयुषी वार्ष्णेय यूक्रेन की टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा है और अगस्त 2021 में घर से छुट्टी बिताकर वापस गई थी। शाम करीब सात बजे टर्नोपिल से आयुषी ने बताया कि इस विश्वविद्यालय में करीब 450 भारतीय छात्र हैं। सभी तीन हॉस्टल में रहते हैं। सैन्य कार्रवाई के अंदेशे पर तीन दिन पहले बाजार से ड्राई फ्रूट, बिस्कुट व अन्य सामान खरीद कर रख लिया था। भारतीय समयानुसार शुक्रवार की अलसुबह तीन बजे राजधानी कीव पर सैन्य कार्रवाई होने पर मेरे हॉस्टल के सभी 150 छात्रों को हास्टल के नीचे बने बेसमेंट में भेज दिया गया। रात तीन बजे से शाम के सात बजे तक बेसमेंट में ही बैठे रहे। खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। सभी लोग ड्राई फ्रूट और बिस्कुट खा रहे हैं। यूक्रेन की राजधानी कीव से मेरा मेडिकल कॉलेज करीब 700 किलोमीटर है। वहां सैन्य कार्रवाई नहीं हुई, पर बाजार व सड़के खाली हो गई। सैन्य वाहन सायरन बजाते दौड़ रहे हैं। आसमान में गूंजते लड़ाकू विमान और हेलीकाप्टर के सायरन सुनकर रूह तक कांप रही है। छात्रों की स्थिति का देखकर परिजन भी चिंता में बैठे हैं।
बदायूं के चिकित्सक की बेटी भी है आयुषी के साथ
चंदौसी। आयुषी वार्ष्णेय ने भाई शशांक वार्ष्णेय को फोन पर बताया कि उसके हॉस्टल में बदायूं के मोहल्ला लालपुर रोड चौधरी सराय निवासी चिकित्सक आरिफ हुसैन की बेटी मुहिता शरीफ भी है। दोनों एक साथ हैं।
बस से पोलैंड के रास्ते होकर फ्लाइट से आने का विचार, सुरक्षा का हवाला देकर रोका
बबराला/चंदौसी। रूस की सैन्य कार्रवाई के बीच यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र सुरक्षा को लेकर भयभीत हैं। यूक्रेन में फंसे गुन्नौर के छात्र सलमान अली ने पिता नौशे अली को फोन पर बताया कि बस से पोलैंड के रास्ते आने का सभी साथियों ने विचार तैयार किया था। पर सफर लंबा होने के कारण प्रशासन ने हमले के दौरान सुरक्षा देने से हाथ खड़े कर दिए और वहीं सुरक्षित रहने की सलाह दी है। बताया कि अभी तक खाने की दिक्कत नहीं है, पर हमले की आवाज सुनकर मन में भय पैदा हो रहा है।
गुन्नौर के मोहल्ला फैजल निवासी नौशे अली का बेटा सलमान अली यूक्रेन की डिनोप्रोपेट्रोस्क मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष की पढाई कर रहा है। नौशे अली की अपने बेटे सलमान अली से शुक्रवार की दोपहर करीब दो बजे बात हुई। बेटे ने पिता को बताया कि उसके साथ छात्रावास में 80 छात्र हैं, इनमें से 40 छात्र भारतीय हैं। यूक्रेन से पौलेंड के लिए बस सेवा जारी है। करीब 17 घंटे का सफर है। सभी साथियों ने मिलकर शुक्रवार की रात बस का सफर कर यूक्रेन से पौलेंड जाने और वहां से फ्लाइट पकड़कर अपने देश जाने का विचार बनाया था। वहां के प्रशासन को अवगत कराया। यूक्रेन प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देकर बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद सलमान व उसके साथियों ने अभी घर आने का विचार त्याग दिया है। बताया कि सभी वतन वापसी की राह देख रहे हैं। रिश्तेदार भी उसकी कुशलता के बारे में पूछ रहे हैं। इस घटनाक्रम से परिजन चिंतित हैं।