संभल। शक के आधार पर युवक को उठाने पहुंची पुलिस ने शुक्रवार को गांव धतरा मेें दबिश के दौरान जमकर उत्पात मचाया। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को डंडों से पीटा और पिस्टल लहराई गई। ग्रामीणों के अनुसार करीब दो घंटे तक पुलिस ने मारपीट कर दशहत का माहौल बनाया। पुलिस की पिटाई से चार महिलाओं समेत दस लोग चोटिल हुए हैं। इसमें दो बुजुर्ग महिलाएं हैं। जिस युवक की तलाश में पुलिस गांव पहुंची थी, उस युवक को बाद में पूछताछ कर छोड़ दिया। सवाल उठता है कि पुलिस ने ऐसी बर्बरता क्यों की। यदि किसी को उठाना था तो मारपीट करने और पिस्टल लहराने की जरूरत क्या थी। महिलाओं को भी पीटा गया। गांव में पुलिस की मारपीट की चर्चा आम है। आसपास के गांव के लोग भी पुलिस की निंदा कर रहे हैं।
शुक्रवार अपराह्न करीब तीन बजे हयातनगर थाना क्षेत्र के गांव धतरा निवासी शीलू पुत्र झम्मन सिंह के घर दो गाड़ियों में सवार आठ लोग पहुंचे। उन्होंने खुद की पहचान बताए बिना ही शीनू की जानकारी करनी शुरू कर दी। शीनू के परिजनों ने सवाल किए तो भड़क गए। कई लोगों को देखकर वहां ग्रामीण भी आ गए।
इसी दौरान भाजपा के पवांसा मंडल महामंत्री गंगाराम सैनी पहुंचे और उन्होंने शीलू को खेत पर मजदूरी के लिए उसके पिता झम्मन सिंह से पूछ लिया। जब गंगाराम सैनी लौटने लगे तो वहां मौजूद आठ लोगों ने खुद को पुलिस कर्मी बताया और पूछताछ शुरू कर दी। मोबाइल भी मांगने लगे। जब गंगाराम सैनी ने मोबाइल देने से इनकार किया तो जबरदस्ती उठाकर गाड़ी में बैठा लिया। गंगाराम सैनी ने शोर मचाया जिसे सुनकर आसपास के ग्रामीण व परिजन भी आ गए।
रोकटोक की तो पुलिस कर्मी बताने वाले लोगों ने पिस्टल निकाल ली और इसी दौरान वहां पड़े डंडों से ग्रामीणों को पीटना शुरू कर दिया। इसमें शीलू के पिता झम्मन सिंह और माता शकुंतला देवी के अलावा गांव निवासी सुनीता देवी, मुन्नी, भूरी, गंगाराम सैनी, छविराम, नन्ने सैनी, जागन यादव और पुष्पेंद्र को चोट आई है। ग्रामीणों के अनुसार तीन बजे से पांच बजे तक पुलिस कर्मी गांव में रहे और मारपीट करते रहे। पूरे गांव में डर का माहौल था।
बाद में ग्राम प्रधान बब्बू सिंह पहुंचे तो वह शीलू को लेकर थाने गए। जहां पुलिस कर्मियों ने पूछताछ की और छोड़ दिया। ग्राम प्रधान का कहना है कि जब उन्होंने ग्रामीणों के साथ मारपीट करने की बात पूछी तो वह ग्रामीणों पर ईंट पत्थर उठाने का आरोप लगा रहे थे। जबकि पुलिस कर्मियों ने ही गांव की महिलाओं को भी पीटा है।
जब मारपीट कर रहे थे तो मैं वीडियो बना रहा था, छत पर पहुंचे और मारपीट की
गांव धतरा निवासी पुष्पेंद्र ने बताया कि जब पुलिस कर्मी बताने वाले लोग गांव के लोगों के साथ मारपीट कर रहे थे तो वह अपने मकान की दूसरी मंजिल से वीडियो बना रहा था। मारपीट करने वाले लोगों ने मुझे वीडियो बनाते हुए देखा और वह तीन लोग छत पर आ गए। उन्होंने मुझे मारा और खींचते हुए छत से नीचे ले आए। जब चाची सुनीता ने बचाने का प्रयास किया तो उन्हें भी पीटा। मेरा मोबाइल रिसेट कर दिया। सारा डेटा खत्म कर दिया। थाने ले जाकर काफी देर बाद छोड़ा।
गांव के लोगों को समझा देना
शीलू ने पुलिस पूछताछ के बाद बताया कि पुलिस कर्मियों ने थाने में मुझसे पूछताछ की और दिल्ली से आने-जाने के बारे में पूछा। इसके बाद जाने के लिए कह दिया। शीलू का कहना है कि जब वह आ रहा था तो पुलिस कर्मी बोले कि गांव के लोगों को समझा देना। किसी को कोई बात न बताएं।
गांव धतरा में मारपीट का कोई मामला नहीं है। गांव में पुलिस बदमाश को पकड़ने के लिए गई थी। ग्रामीणों का आरोप गलत है। मारपीट नहीं की गई है।
-जितेंद्र सिंह, सीओ, संभल
गांव धतरा के युवक को पूछताछ के लिए पुलिस टीम लेने गई थी। युवक मिला नहीं था तो उसके पिता को लेकर पुलिस कर्मी आ रहे थे। इसका ग्रामीणों ने विरोध किया। इसी बात पर ग्रामीणों के साथ पुलिस ने मारपीट की। इसमें भाजपा के पवांसा मंडल महामंत्री गंगाराम सैनी को भी चोट आई है। गांव के लोगों का कहना है कि महिलाओं को भी पीटा गया है। इस मामले की जानकारी सीओ और भाजपा जिलाध्यक्ष को दे दी गई है।
अवधेश प्रताप सिंह, जिला पंचायत सदस्य