संभल। एक तरफ मलेरिया विभाग की टीम घरों और मोहल्लों को सैनिटाइज करके मलेरिया के साथ बीते दो वर्ष में कोरोना को हराने में मददगार बनी रही, तो वहीं दूसरी ओर यह सरकार की उदासीनता से अब तक लाचार है। विभाग के पास न पूरा स्टॉफ है और न गाड़ियां। रिमाइंडर पर रिमाइंडर शासन को भेजे जाते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। जिले में जिला मलेरिया अधिकारी, अस्टिटेंट मलेरिया अधिकारी और दो मलेरिया निरीक्षक को छोड़कर न चालक हैं और न कीट संग्रहकर्ता। यदि कहीं कीट संग्रहकर्ता की आवश्यकता हुई तो उन्हें मुरादाबाद से बुलवाया जाता है। जिला मलेरिया अधिकारी विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि स्टॉफ और गाड़ियों के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी से पत्राचार किया जा रहा है। वर्ष-2022 में जनवरी से अब तक 8640 सैंपल की जांच की जा चुकी है जिनमें से मलेरिया के सिर्फ छह मरीज मिले हैं। जबकि वर्ष-2021 में 32538 सैंपलों की जांच हुई थी। इनमें से 120 मरीज पॉजिटिव मिले थे। अब पूरे वर्ष के लिए योजना बनाई गई है। ब्लाक स्तर पर टीम है, जो गांव-गांव जाकर मलेरिया से बचाव के लिए न सिर्फ एंटी लार्वा का छिड़काव कर रही है, बल्कि लोगों को भी जागरूक कर रही है।
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वर्ष-2008 से मनाया जाता है विश्व मलेरिया दिवस
संभल। मलेरिया एक मच्छर जनित बीमारी है। यह प्रचलित संक्रामक रोगों में से एक है। इस रोग से हर साल विश्व में करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं। अहम बात यह है कि दुनियाभर में कुल मलेरिया के मामलों में से 11 प्रतिशत भारत में मिलते हैं। देश को 2027 तक मलेरिया से मुक्त करने और 2030 तक इसके उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है लेकिन संभल जिले में नियंत्रण हो पाएगा, इस पर संशय पैदा हो गया है। वजह यह है कि बिना स्टॉफ इस पर कैसे नियंत्रण हो पाएगा। जिला बने एक दशक बीत पर स्टॉफ की नियुक्ति नहीं हो सकी। जिला मलेरिया अधिकारी बताते हैं कि विश्व मलेरिया दिवस की शुरुआत 25 अप्रैल-2008 से हुई थी। इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मलेरिया दिवस मनाया जाता है। दिवस मनाने की पूरी तैयारी है।
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पांच प्रकार का होता है मलेरिया
सामान्यता मलेरिया एक प्रकार का माना जाता है, जबकि मलेरिया पांच प्रकार का होता है। यह कोई मामूली बीमारी नहीं होती है, बल्कि जाने लेवा बीमारी होती है। इस बीमारी के मरीजों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। जिससे बड़ी तेेजी के साथ मरीज मलेरिया गिरफ्त में आ रहे हैं। मरीजों को बचाने के लिए मच्छरों का खात्मा करने के लिए किए गए उपाय भी बेकार साबित हो रहे हैं। ऐसे में मलेरिया से खुद ही सावधानी बरतनी जरूरी है।
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कैसे होता है मलेरिया
संभल। जिला मलेरिया अधिकारी विनोद कुमार शर्मा के मुताबिक मलेरिया मादा एनाफ्लीज मच्छर के काटने से फैलता है। एनाफ्लीज रुके हुए साफ पानी में प्रजनन करता है। मलेरिया का संक्रमण काल जुलाई से नवंबर तक चलता है। मलेरिया के रोगी को तेज ठंड व कंपकंपी के साथ एक दो या तीन दिन के अंतराल पर तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द रहता है। बहुत अधिक पसीने के साथ बुखार उतर जाता है।
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यह बरतें सावधानी
संभल। घर और आसपास साफ पानी जमा न होने दें। कूलर व पानी की टंकी सप्ताह में एक बार खाली करके उसे सुखा कर दोबारा प्रयोग करें। शरीर के अधिकांश भाग को ढकने वाले कपड़े पहनें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। दिन छिपने के साथ खिड़की और दरवाजे बंद रखें। बुखार आने पर खून की जांच कराएं।