संभल। कई बार परिवारों को तोड़ने और जिंदगी में जहर घोलने की वजह बना सोशल मीडिया इस बार बिछड़े हुए परिवार को मिलाने के काम आया। सरहद पार मानव तस्करी करके भेजी गई संभल निवासी मुन्नी 40 साल बाद वॉट्स एप पर मिले एक वीडियो लिंक के जरिये अपने परिवार से जुड़ सकी। कराची से अपने भाइयों से वीडियो कॉल के जरिये बात करके भावुक हुई मुन्नी उर्फ बुशरा जल्द से जल्द अपने परिवार से मिलने का इंतजार कर रही हैं। परिवार भी इंतजार में है कि प्रशासन और सरकार उनकी मदद करके 40 साल पहले बिछड़ी बहन को मिलवाने में उनकी मदद करें।
सरायतरीन के हिझडान निवासी मोहम्मद छिद्दन की 12 वर्षीय बेटी मुन्नी को 1981 में उसकी सौतेली मां के बहनोई ने बेच दिया था। घर वालों ने बहुत तलाश किया लेकिन वह नहीं मिली। इसके बाद वह पाकिस्तान पहुंचा दी गई। मुन्नी ने कई वर्ष पाकिस्तान में गुजारे। बाद में उससे पाकिस्तान के एक व्यक्ति ने निकाह कर लिया। वहां उसका नाम बुशरा रखा गया। बुशरा के तीन बेटी और एक बेटा है। इस बीच उसे परिवार से बिछड़ने का गम उसे रोजाना परेशान करता। उसने पाकिस्तान के एक व्यक्ति से आपबीती बताई तो उसने एक वीडिया बनाकर यू-ट्यूब पर अपलोड किया। कुछ दिन पहले मुन्नी के भाई मुन्ना के मोबाइल पर फारवर्ड होते हुए वीडियो का वह लिंक पहुंचा तो उसे अपनी 40 साल पहले बिछड़ी बहन की सूरत याद आई। वीडियो में दिख रही बुशरा की कहानी सुनकर मुन्ना को समझने में देर न लगी यह बुशरा और कोई नहीं बल्कि उसकी छोटी बहन मुन्नी है।
बहन का वीडियो देख मुन्ना के आंसू छलक उठे। सोशल मीडिया के माध्यम से मुन्ना उस व्यक्ति तक पहुंचा गया जिसने वीडियो बनाकर वायरल किया था। जब मुन्नी को अपने परिवार के मिलने की जानकारी हुई तो खुशी से उसकी आंखे नम हो उठीं। गुरुवार को वीडियो कॉल से बातचीत की। मुन्नी के छोटे भाई अकरम ने बताया कि उनकी बहन 1981 में लापता हुई थीं तब वह डेढ़ महीने के थे और उनके बड़े भाई मुन्ना 15 साल के थे। भाई मुन्ना और अन्य रिश्तेदारों ने बहन के लापता होने की जानकारी दी थी। अब वीडियो सामने आई तो जानकारी मिली कि उनकी बहन मुन्नी पाकिस्तान में रहती हैं।
अकरम ने बताया कि उनकी दो बहन और तीन भाई हैं। एक बहन की मौत हो गई है। तीनों भाई की आर्थिक स्थित मजबूत नहीं है। वहीं मुन्नी अपने तीनों भाई और अपने रिश्तेदारों से मिलना चाहती हैं लेकिन वीजा और पासपोर्ट अभी नहीं है। भाइयों की हालत ऐसी नहीं है कि वह अपनी बहन से मिलने के लिए पाकिस्तान चले जाएं।
सरकार बहन से मिलने में करे मदद : अकरम
मुन्नी के छोटे भाई अकरम का कहना है कि बहन का पता लगने के बाद उससे मिलने की ख्वाहिश है। पूरा परिवार उसे यहां बुलाना चाहता है। लेकिन न तो आर्थिक हालात ऐसे हैं न ही जरिया पता है। उन्होंने प्रशासन और सरकार से मदद मांगी है कि वह बहन तक पहुंचने में मदद करें। परिवार मजदूरी करके अपनी गुजर बसर करता है। अकरम ने बताया कि वह अधिक पढ़े लिखे नहीं है इसलिए कागजी कार्यवाही की भी ज्यादा समझ नहीं है। सरकार ने पहले भी कई बिछड़े लोगों को उनके परिवार से मिलाया है ऐसे ही हमारी भी मदद करे।
40 साल सहा है दर्द, अब घर वालों से मिलना है : मुन्नी
वीडियो कॉल पर अपने भाई, भाभी और परिवार के अन्य लोगों से बातचीत करते हुए मुन्नी ने 40 साल की कहानी सुनाई तो उनके आंसू बहने लगे। मुन्नी ने बताया कि रिश्तेदार ने दिल्ली ले जाकर हरियाणा के एक व्यक्ति को उसे बेच दिया। उससे हरियाणा में पशुशाला में काम कराया जाता था। भरपेट खाना भी नहीं मिलता था। बाद में उसे और उसके साथ कुछ और लड़कियों को पाकिस्तान के किसी व्यक्ति को बेच दिया गया। राजस्थान से सीमा पार कराई गई। उसके बाद कई वर्ष वह पाकिस्तान में परेशानियों के बीच रही। 21 वर्ष पहले पाकिस्तान के एक व्यक्ति से उससे शादी करके उसका नाम बुशरा रख दिया। अब तीन बेटी और एक बेटा है। मुन्नी ने वीडियो कॉल पर जल्द से जल्द परिवार से मिलने की इच्छा जताई। उसने कहा कि वह अपने घर आकर अपने बचपन के खोये दिनों को याद करना चाहती है।