संभल के एमजीएम महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बोलते वक्ता।
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संभल। नगर के एमजीएम महाविद्यालय में दिल्ली की भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद की ओर से संपोषित हिंदी विभाग के नेतृत्व में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें कबीर के दार्शनिक व सामाजिक दृष्टिकोण को उजागर किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान का भी होना जरूरी है।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। डॉ. मोहम्मद इमरान खान ने कबीर दास के सांस्कृतिक दृष्टिकोण व वर्तमान संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. निरंकार सिंह ने की। इसमें रामपुर के राजकीय महाविद्यालय के डॉ. अब्दुल लतीफ मौजूद रहे। विषय विशेषज्ञ के रूप में डा. फहीम अहमद, राजेश कुमार, मोहम्मद अहमद रहे। इस सत्र में शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इसमें कबीर के दार्शनिक व सामाजिक दृष्टिकोण को उजागर किया।
मुख्य अतिथि राजकीय महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. प्रभा शर्मा ने कहा कि कबीर की वाणी व उनके सांस्कृतिक व सामाजिक दृष्टिकोण का आज भी उतना ही महत्व है जितना मध्यकालीन समाज में था। डॉ. मीरा कश्यप ने कहा कि हमें किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. डीएन शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है। यह अपने अंदर वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति को समेटे हुए है। हिंदी साहित्य संत कबीर का साहित्य भी अपने अंदर इसी भावना को समेटे है। प्राचार्य डा. योगेंद्र सिंह ने भी अपने विचार रखे। संचालन डा. फहीम अहमद ने किया।