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आम की फसल को रोगों से बचाने के लिए दी सलाह

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जिला उद्यान अधिकारी सुघर सिंह ने बागवानी फसलों को रोगों से बचाने के लिए अलर्ट जारी किया है। साथ ही आम की फसल के उत्पादकों को बागों में कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी है। कहा, इस वर्ष आम की फसल को सम सामयिक हानिकारक कीटों से बचाने के लिए सभी किसान समय से इसका प्रबंध करें।
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मुख्य रूप से भुनगा रोग, मिज किट व खर्रा रोग होने से आम की फसल खराब होती है। आम के बागों में भुनगा कीट कोमल पत्तियां व छोटे फलों के रस को चूसकर हानि पहुंचाता है। रोग वाला भाग सूख कर गिर जाता है। साथ ही यह कीट मधु की तरह का पदार्थ भी निकालता है, जिससे पत्तियों पर काले रंग की फफूंद जम जाती है। इस दौरान आम के बौर में लगने वाला मिज कीट मंजरियों व फलों में मुलायम कोलो में अंडे देती हैं। जिसकी सुंडी अंदर ही अंदर खाकर फल को खराब कर देती है। रोग वाला भाग काला होकर सूख जाता है। भुनगा व मिज के रोगों से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड, क्लोरपाइरिफास व डायमेथेएट पानी में घोलकर छिड़काव करने से रोग नहीं होता है।
खर्रा के प्रकोप से फल व डंठलों पर सफेद चूर्ण के समान फफूंद जम जाती है। रोग वाला भाग पीला पड़ जाता है और मंजरियां सूखने लगती हैं। इस रोग से बचाने के लिए ट्राईड्रोमार्फ भुनगा कीट के नियंत्रण के लिए प्रयोग किए जा रहे घोल के साथ मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। सभी किसानों से आह्वान किया है कि बागों में जब बौर पूरी तरह से खिला जाए तो उस अवस्था में कम से कम रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया जाए। जिससे पर-परागण क्रिया प्रभावित नहीं हो।
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