संभल/असमोली। संभल तहसील के गांव मुबारकपुर बंद में तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण करना महंगा पड़ गया। अवैध कब्जे को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अब अवैध कब्जेदार को कार्रवाई के घेरे में लिया है। राजस्व कर्मचारी जांच आख्या प्राप्त होने के बाद उप जिलाधिकारी ने मंगलवार को असमोली थाने के प्रभारी निरीक्षक को अवैध कब्जेदार के खिलाफ सुसंगत धाराओें में रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है।
अमर उजाला ने अवैध कब्जों को हटाने और जल स्रोत सुरक्षित करने के संबंध में खबरों की श्रृंखला प्रकाशित की है। इसके बाद प्रशासन भी चेता है। संभल तहसील के उप जिलाधिकारी ने सबसे पहले अवैध कब्जों पर कार्रवाई के लिए शिकंजा कसा है। इसी क्रम में उन्होंने मंगलवार को अवैध कब्जे के एक मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश पारित किया।
आदेश की प्रति असमोली के प्रभारी निरीक्षक के पास भेजी गई है। मामला संभल तहसील के गांव मुबारकपुर बंद का है। यहां पर तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत थी। गुमसानी के लेखपाल पुष्पेंद्र सिंह ने इस मामले में मंगलवार को जांच की।
जांच में पता लगा कि मुबारकपुर बंद गांव में एक गाटा संख्या ऐसा है जो राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में तालाब की श्रेणी में दर्ज है पर गांव के ही नन्हू द्वारा अवैध रूप से निर्माण करके कब्जा किया गया।
यह कार्य कोई भू-माफिया ही करता है। इसलिए लेखपाल ने कार्रवाई प्रस्तावित की। उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव ने बताया कि लेखपाल की आख्या मिलते ही असमोली के प्रभारी निरीक्षक को रिपोर्ट दर्ज करने के लिए आदेश दिए गए हैं। साथ ही अवैध कब्जा हटाने के लिए कहा गया है।
तालाबों-नदियों की जमीन से कब्जे हटाने के अभियान को मिलेगी रफ्तार
संभल। पहले मतदान फिर मतगणना की ड्यूटी के चलते जिला प्रशासन अब तक प्रशासन व्यस्त था। मतगणना 23 मई को हो गई। अब एक बार फिर राजस्व संबंधी कार्यों में अधिकारी लौट आए हैं। इसमें सबसे अहम है यह है कि सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति पर किसी भी हालत में अवैध कब्जे न होने दिए जाएं। अपर जिलाधिकारी लवकुश त्रिपाठी ने इन बातों का उल्लेख करते हुए मंगलवार को शाम कहा कि नदी और तालाबों की जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे हैं। इन्हें हटाने के लिए पहले ही सभी तहसीलदारों और उप जिलाधिकारियों को आदेश दिए जा चुके है। अब कब्जे हटाने के काम को रफ्तार के साथ कराया जाना है। लेखपालों के माध्यम से अवैध कब्जे चिह्नित कराने और फिर उन्हें हटाने के लिए काम होगा।
बड़े कब्जेदार भू-माफिया की श्रेणी में आएंगे
संभल। जिन लोगों ने बड़े पैमाने पर नदी और तालाबों की जमीन को घेर लिया है और खेती कर रहे हैं। प्रशासन के बार बार कहने के बाद भी नदी तालाब की जमीन को छोड़ नहीं रहे हैं। ऐसे लोगों को भू-माफिया की श्रेणी में लिया जाएगा और उनके कब्जे हटाने के साथ उनके खिलाफ थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। संभल के उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव ने बताया कि वह इस संबंध में काम कर रहे हैं। जल्दी ही कुछ लोगों को चिह्नित कर लिया जाएगा। हर हालत में जल स्रोत सुरक्षित करने के लिए प्रशासन काम करेगा। क्योंकि इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने समय-समय पर निर्देश जारी किए हैं।