संभल। मध्य गंगा नहर परियोजना 2007-2008 में मंजूर हुई थी। परियोजना में पहले बजट की कमी रही अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया धीमी चल रही है। नहर का काम 11 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका। इसीलिए लागत बढ़ी और परियोजना का बजट पुनरीक्षित किया गया। अबकी बार राज्य एवं केंद्र सरकार ने धनराशि भरपूर दी है। साथ ही दिसंबर 2019 तक काम पूरा करने का लक्ष्य दिया है लेकिन काम की रफ्तार ऐसी नहीं है कि निर्धारित समय में काम पूरा हो सके। इस बीच किसान सिंचाईं के लिए तरस रहे हैं।
मुरादाबाद मंडल के चार जनपदों के साथ बुलंदशहर और बदायूं के किसानों को लाभ देने के लिए मध्य गंगा नहर 2007-08 में 1060.76 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना बनाई है। अब लागत बढ़कर 4700 करोड़ हो गई है। इसकी मंजूरी भी भारत सरकार से मिल गई है। परियोजना में 2008 से 2013 तक काम हुआ लेकिन 2013 से 2017 तक न के बराबर काम हुआ। कई डिवीजनों में बजट न मिलने से काम ठप रहा।
अधिकारी और कर्मचारी खाली बैठे रहे। इसके चलते लागत बढ़ी और काम में देरी हुई। जिसका खामियाजा अब तक किसान भुगत रहे हैं। इस बीच अच्छी बात यह है कि अब बजट की कमी नहीं है। लेकिन जमीनों के अधिग्रहण में थोड़ी बहुत बाधाएं है।
कहीं-कहीं अधिग्रहण के बदले दिए गए मुआवजे पर आपत्तियां हैं। इससे कार्य की रफ्तार प्रभावित है। वर्ष 2007-2008सेचल रहे इस प्रोजेक्ट पर मार्च 2019 तक 1590.34 करोड़ रुपये व्यय हो चुके हैं। परियोजना में कुल 47 प्रतिशत काम हुआ है।
53 प्रतिशत काम शेष है। जिसके दिसंबर तक पूरा होने के आसार नहीं हैं। मध्य गंगा नहर परियोजना में काम कर रहे सहायक अभियंता हैदर मेंहदी ने बताया कि नहर बनाने के लिए जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है जिसमें कुछ बाधाएं आ रहीं हैं। इससे निर्माण कार्य फंसा हुआ है। बाधाओं को दूर करके काम की रफ्तार को तेज किया जाएगा।
नहर प्रणाली का सबसे ज्यादा लाभ संभल को मिलेगा
संभल। नहर बनने पर बसे ज्यादा लाभ संभल और अमरोहा जनपद के किसानों को होना है। कुल 1.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी। इसमें जनपद संभल की 70917 हेक्टेयर जमीन और अमरोहा जिले की 59046 हेक्टेयर जमीन की सिंचाईं किया जाना प्रस्तावित है। इसके साथ ही मुरादाबाद जनपद की 16559 हेक्टेयर भूमि की सिंचाईं करने का लक्ष्य है।
यह है मध्य गंगा नहर
गंगा नदी बिजनौर से मध्य गंगा नहर को पानी मिलेगा। इसके लिए गंगा नदी से 30 मीटर चौड़ी मुख्य नहर निकाली जा चुकी है। मुख्य नहर का पानी शाखाओं के जरिए चंदौसी और बहजोई तक आएगा। शाखाओं के निर्माण का काम अधूरा पड़ा है। इसके पूरा होने पर संभल जिले में बिजनौर की तरह नहरों का जाल बिछ जाएगा। जमीन का जल स्तर ठीक होगा और किसानों को समय पर सिंचाईं के लिए पानी मिल सकेगा।
नहर से जुड़ीं मुख्य बातें
मुरादाबाद मंडल के बिजनौर, संभल और मुरादाबाद के साथ अमरोहा जिले के किसानों को सिंचाईं के मामले में राहत मिलेगी। प्रधानमंत्री की कृषि सिंचाईं योजना में मंजूरी मिली है। मध्य गंगा नहर बनाने का काम नहर विभाग की 16 डिवीजन कर रही हैं। अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, हरिद्वार, बुलंदशहर, अलीगढ़, गढ़मुक्तेश्वर में यह डिवीजन स्थापित हैं। 1056 करोड़ रुपये मध्य गंगा नहर फेज टू प्रोजेक्ट की लागत 2007-08 में थी। अब लागत 4700 करोड़ है। इसकी मंजूरी मिल गई है।
कुल रकम में सबसे अधिक धन 2400 करोड़ रुपये जमीन के अधिग्रहण पर खर्च होंगे। जबकि 1300 करोड़ रुपये नहर के निर्माण पर व्यय होगा।