समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव को देखते फिर अति पिछड़ा कार्ड का दांव खेला है। सपा के प्रदेश कर्यालय में शनिवार को 17 अति पिछड़ी जातियों का सम्मेलन बुलाया गया। सम्मेलन में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को ही इन जातियों को दलितों का दर्जा देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है।
साथ ही बजट में कुछ ऐसे प्रावधान करने जा रही है जिससे अति पिछड़ी जातियों को प्रदेश में कुछ अतिरिक्त सुविधाएं मिलने लगेंगी। मुख्यमंत्री ने निषाद राज की जयंती पर 5 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश की भी घोषणा की।
सम्मेलन में कुछ जातियों विशेष तौर से बायर, गोंड के प्रतिनिधियों ने कुछ जिलों में अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र न बन पाने का मामला उठाया तो तुरहा बिरादरी के प्रतिनिधियों ने शिकायत की कि उन्हें अति पिछड़ी जातियों में अनावश्यक शामिल किया जा रहा है। वे तो पहले से ही अनुसूचित जाति में आते हैं। मुख्यमंत्री ने सभी मामलों में कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन अति पिछड़ी जातियों को मछुआ आवास या इंदिरा आवास नहीं मिल पाए हैं, उन्हें लोहिया आवास देने के आदेश दे दिए गए हैं। बुंदेलखंड में इन आवासों के साथ सोलर लाइट भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सपा यह नहीं भूल सकती कि बसपा सरकार के कार्यकाल के दौरान अति पिछड़ी जातियों ने किस तरह सपा के संघर्ष में साथ दिया।
नेताजी (मुलायम सिंह यादव) जब मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने भी इन जातियों कोअनुसूचित जाति का दर्जा देने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, लेकिन 2007 में सत्ता में आई बसपा ने इस फैसले को पलट दिया। सपा सरकार ने फिर यह प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया है।
इन जातियों को दलित का दर्जा देने का प्रस्ताव
राजभर, निषाद, मल्लाह, कहार, कश्यप, कुम्हार, धीमर, बिंद, प्रजापति, धीवर, भर, केवट, बाथम, मछुआ, तुरहा, मांझी और गौंड। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र भले ही इन जातियों को दलित का दर्जा ने दे लेकिन प्रदेश सरकार बजट में ऐसे प्रावधान करने जा रही है जिससे इन जातियों को कुछ विशेष सुविधाएं मिलने लगेंगी।
देंगे विशेष अवसर: शिवपाल
वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि सरकार अति पिछड़ी जातियों को विशेष अवसर देगी। इन जातियों के लोगों के लिए रोजगार व विकास के काम किए जाएंगे।