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सलमान पाकिस्तानी नागरिक तो नहीं..?

Thu, 04 Apr 2013 01:08 AM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
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19 साल बाद सलमान के अलीगढ़ आने का रास्ता साफ हो गया है।
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इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त ने पाकिस्तान सरकार से यह साक्ष्य मांगे हैं कि 19 साल के दौरान सलमान को पाकिस्तान की नागरिकता तो नहीं दी गई?

भारतीय उच्चायुक्त के इस निर्देश के बाद पाकिस्तान सरकार ने करांची नगर निगम, राशनिंग आफीसर, इलेक्शन कमीशन सहित आधा दर्जन महकमों से एक सप्ताह में यह ब्यौरा मांगा है।

इन सभी के स्तर से पाकिस्तानी नागरिकता न दिए जाने के प्रमाण मिलने के बाद ही भारतीय उच्चायुक्त पासपोर्ट बनवाकर सलमान को भारत भिजवाएगा।

जयगंज से पठानान मोहल्ला में कन्फेक्शनरी के कारोबारी हाफिज विकार और उनकी पत्नी सलमा 24 मार्च को अपने बेटे सलमान को लाने के लिए पाकिस्तान गए थे।

हाफिज विकार ने मोबाइल पर बताया कि उन्होंने इस्लामाबाद स्थित भारत के उच्चायुक्त के समक्ष 19 साल से पाकिस्तान में रह रहे अपने बेटे के साक्ष्य पेश किए थे।
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इन साक्ष्यों से उच्चायुक्त सहमत थे लेकिन एक आशंका यह थी कि इस लंबे समय में उसने कहीं पाकिस्तान की नागरिकता तो नहीं ले ली। इसीलिए पाकिस्तान सरकार से नागरिकता के बारे में ब्यौरा मांग लिया है।

यह पत्र पाकिस्तान सरकार के साथ-साथ वहां की नगर निगम तथा अन्य विभागों में बुधवार को सौंप दिए हैं। उन्हें अब पूरी उम्मीद है कि उनका बेटा सलमान अलीगढ़ आ जाएगा।

सरपरस्ती नहीं तो तालीम नहीं
मोबाइल पर बातचीत में सलमान ने बताया कि कक्षा आठ पास होने के बाद उसकी नानी का इंतकाल हो गया। उसके बाद आगे की पढ़ाई में स्थानीय अभिभावक की सरपरस्ती नहीं होने से उसकी पढ़ाई बंदा करा दी गई।

सलमा की दास्तां
करांची के सेक्टर-5 एल नॉर्थ के मकान नंबर एल-270 निवासी सलमा का कहना है कि उनका निकाह सन् 1981 में अलीगढ़ के पठानान मोहल्ला निवासी हाफिज वकार अहमद से हुआ था।

सन् 1991 में बेटे सलमान अहमद का जन्म हुआ और 1994 में वह उसे लेकर पाकिस्तान गये। कुछ दिन रुकने के बाद वहां सलमान की तबियत खराब हो गई।

इधर, उनके वीजा की अवधि समाप्त हो रही थी इसलिये अपने बेटे को अम्मी के पास पाकिस्तान छोड़कर भारत आ गए। वर्ष 2006 में नूरी वीजा से दोबारा पाकिस्तान गई और बेटे को लाने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
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जुलाई 2012 में फिर पाकिस्तान पहुंची और उसके सारे दस्तावेज अंसार बर्नी ट्रस्ट इंटरनेशनल में जमा कराए। तमाम कोशिश के बावजूद निराशा हाथ लगी, दो महीने पहले अमर उजाला में इस खबर के प्रकाशित होने के बाद सलमान को अलीगढ़ लाने के प्रयास तेज हो गए हैं।
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