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जीवन रक्षक दवाओं में नशा खोज रहे युवा

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जीवन रक्षक दवाओं में नशा खोज रहे युवा
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सहारनपुर। मेडिकल साइंस में ऐसी कई दवाएं हैं, जो सिर्फ चिकित्सक द्वारा मरीज के पर्चे पर लिखने के बाद ही मिलती है। ये दवाएं खासकर मानसिक तनाव के रोगियों के लिए होती है, लेकिन इन दवाओं में युवा नशा ढूंढ लेते हैं। चोरी-छिपे इन दवाओं का इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है। बड़े पैमाने पर ऐसी दवाओं की तस्करी होने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
एक वर्ष में पुलिस ने ऐसे 253 मामले पकड़े हैं। दरअसल, कई प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल सिर्फ चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाता है। नियमों के अनुसार इन दवाओं की बिक्री के लिए मेडिकल स्टोर स्वामी को रजिस्टर बनाना पड़ता है। दवाओं की बिक्री से संबंधित हिसाब स्वास्थ्य विभाग को देना होता है, लेकिन इसके बाद भी बड़े पैमाने पर जनपद में प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी हो रही है। मेडिकल स्टोरों पर भी इन दवाओं को चोरी-छिपे बेचा जाता है। इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्रवाई में हो चुका है। युवाओं में नशे के लिए ऐसी दवाओं का इस्तेमाल करने के मामले बढ़े हैं।
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पड़ोसी राज्यों तक होती है सप्लाई
जनपद में बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं की सप्लाई होती है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब सहारनपुर से हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड में प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई की गई है। इसको लेकर कई बार पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड पुलिस ने किशनपुरा स्थित दवा मार्केट और देहात क्षेत्रों में छापामारी भी की है।
नशे के लिए घातक हैं यह दवाएं
मनारोग विशेषज्ञ डाक्टर अमरजीत पोपली और डाक्टर एजाज अहमद का कहना है कि प्रतिबंधित दवाएं सिर्फ चिकित्सक की सलाह पर ही मरीज को दी जाती है। खासकर मानसिक रोगियों के लिए यह दवाएं चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही फायदेमंद होती हैं, लेकिन अगर कोई नशे के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल करता है तो उसके घातक परिणाम सामने आते हैं।
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पुलिस की ओर से लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। कई तस्करों को भी पुलिस ने पकड़ा है। अगर कोई प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। - आकाश तोमर, एसएसपी
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