बड़गांव। निर्माणाधीन दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर रविवार रात गांव मौरा के पास गंगा लिंक नहर पर पुल निर्माण के दौरान क्रेन की वायर स्लिप होने से गर्डर गिरने की घटना के बाद रात भर काम बंद पड़ा रहा। सोमवार की सुबह कार्यदायी संस्था ने नई मशीन मंगाकर फिर से काम शुरू कर दिया है। सोमवार शाम दिल्ली से आई टीम ने भी पहुंचकर जांच की।
बता दें, कि शनिवार देर शाम दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर गांव मोरा के नजदीक देवबंद कैनाल के फ्लाईओवर निर्माण के दौरान क्रेन स्ट्रिंग/ वायर स्लिप होने के कारण एक गर्डर पहले से लांच किए गए चार गर्डर को लेकर नीचे गिर गया था। इस हादसे में दो मजदूर घायल हो गए थे तथा पांच गर्डर भी क्षतिग्रस्त हुए थे। रात में ही घायल मजदूरों को मलबे से निकाल कर सहारनपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद रात भर काम बंद पड़ा रहा था।
सोमवार सुबह नई मशीन मंगाकर साइट इंजीनियर सोनू कुमार की देखरेख में कार्य शुरू किया गया। सोमवार सुबह 11 बजे एनएचएआई के सदस्य वीके रजावत एवं प्रोजेक्ट डायरेक्टर नरेंद्र सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों को दिशा निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण मुख्यालय नई दिल्ली की ओर से विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। सोमवार शाम दिल्ली हेड क्वार्टर से क्वालिटी एक्सपर्ट टीम ने पहुंचकर घटना की जांच की।
किसान संगठन नेता ने लगाए घटिया निर्माण सामग्री के आरोप
भारतीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष ठाकुर अजब सिंह ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में घटिया सामग्री प्रयोग करने आरोप लगाते हुए कहा कि अगर इसकी जांच की जाए तो दूध का दूध पानी पानी हो जाएगा। हादसे के बाद मौके पर जुटी ग्रामीणों भीड़ ने निमार्णाधीन फ्लाईओवर के पास रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर फ्लाईओवर के दोनों ओर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था होती तो शायद घटना होती।
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देर तक किया जा रहा था काम
प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर अनुज पांडेय ने बताया कि सोमवार को गंगनहर में पानी छोड़ने का समझौता हुआ था, जिसके लिए फ्लाईओवर पर गर्डर रखने का कार्य अंतिम चरण पर था। निर्धारित समय पर कार्य पूरा करने के लिए देर शाम तक भी कार्य किया जा रहा था। फ्लाईओवर के बीम पर चार गर्डर सुरक्षित रखे जा चुके थे। क्रेन में आई तकनीकी खराबी के चलते पांचवें गर्डर को रखते समय एक झटका लगा जिस कारण एक के बाद एक टकराकर पांचों गर्डर धमाके के साथ नीचे जा गिरे। नहर में पानी छोड़ने के लिए सिंचाई विभाग से एक दो दिन का समय और मांगा गया है।
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पहले हो चुके हादसों पर एक नजर
-अक्तूबर में बिहारीगढ़ में बिना सुरक्षा उपकरणों के फ्लाई ओवर पर वेल्डिंग कर रहा मिस्त्री नीचे आ गिरा था।
-दिसंबर के आखिरी सप्ताह में लाखनौर टोल प्लाजा के पास सड़क पर रखे डिवाइडरों से आधा दर्जन वाहन टकरा गए थे।
-तीस दिसंबर को गणेशपुर में हाईवे पर बीचोबीच खोद कर छोड़े गए गड्ढे में बाइक सवार और बाद में कार जा गिरी थी।
- जनवरी के पहले सप्ताह में मनोहरपुर में हाईवे पर रखे डिवाइडरों से टकरा कर कार सवार दंपती गंभीर रूप से घायल हो गए थे।