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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

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डा सलोनी गर्ग - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कभी अबला समझी जाने वाली महिलाएं अब सशक्त होकर प्रत्येक क्षेत्र में मुकाम हासिल कर रही हैं। वे परिवार की जिम्मेदारी उठाने से पीछे नहीं हट रही हैं। अफसर और जज बन अपनी प्रशासनिक दक्षता का लोहा मनवा ही रही है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पेश है जिले की कुछ ऐसी ही महिलाओं की कहानी जिन्होंने सफलता के नए सोपान गढे़ हैं।
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सिलाई कर बेटियों को दिला रहीं उच्च शिक्षा
देवबंद। गांधी कॉलोनी निवासी सोनी की पत्नी जूली ऐसे निर्बल वर्ग (गंधीला) से ताल्लुक रखती हैं जिस समाज में शिक्षा का कोई महत्व नहीं है। जूली ने इससे हटकर बेटियों को शिक्षित करने की ठानी है। पहले जूली और उसके पति सोनी ने प्लास्टिक के खिलौने व छाज बनाकर बेचे, जिससे परिवार का गुजारा किया। इसके बाद सोनी ने पैडल रिक्शा चलानी शुरू की, लेकिन वह लगातार बीमार रहने लगा तो पत्नी जूली ने कपड़ों की सिलाई कर परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई। जूली की बड़ी बेटी बीएड में पढ़ रही तो छोटी बेटी शिखा एलएलबी की पढ़ाई कर रही है। वह अपनी बेटियों के साथ साथ अपने समाज और आसपास की गरीब बेटियों को सिलाई भी सिखा रही है। जूली ने दिखाया कि परिस्थिति कैसी भी हो यदि एक महिला ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं है।
गंगोह की बेटी है युवा कल्याण अधिकारी
गंगोह। नगर के व्यापारी प्रवेश गर्ग की बेटी सलोनी गर्ग की शादी 2017 में हरदोई के सत्य प्रकाश के साथ हुई थी। सलोनी ने शादी होने के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने वर्ष 2017 में ही पीसीएस की परीक्षा दी जिसमें उत्तीर्ण होने के बाद वर्ष 2019 में उन्होंने इंटरव्यू दिया और पीसीएस के लिए चुन ली गईं। चयन होने के बाद 2020 में उसे युवा कल्याण अधिकारी मेरठ बनाया गया। उनके पति भी पीसीएस हैं। सलोनी के एक बेटा है। छोटा बच्चा होने के बावजूद वह पारिवारिक जिम्मेदारी के साथ ही प्रशासनिक दायित्वों का भी बखूबी निर्वहन कर रही हैं। परिवार के साथ ही नगर के लोगों को भी अपनी इस बेटी की उपलब्धि पर गर्व है।
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गाजियाबाद में अपर जिला जज है बडूली की बेटी
बड़गांव। गांव बडू़ली निवासी किसान साधू सिंह की पौत्री अदिति ने अपनी शादी के दो साल बाद यूपी पीसीएस जे वर्ष 2018 की परीक्षा में 132 वीं रैंक प्राप्त कर परिजनों के साथ ही क्षेत्र का नाम रोशन किया है। अदिति सिंह वर्तमान में गाजियाबाद में अपर जिला जज के पद पर तैनात हैं। उनकी इस उपलब्धि पर गांव के साथ ही पूरे क्षेत्र को गर्व है। यही नहीं अदिति के पिता अशोक कुमार भी न्यायिक सेवा में हैं। वे गौतमबुद्धनगर में जिला जज हैं।
शादी के बाद जज बन कर किया सपने को साकार
बड़गांव। गांव मौरा की बहू रागिनी ने अपनी मेहनत के बल पर यूपी एचजेएस में 9 वीं रैंक पाकर जिले का नाम रोशन किया है। रागिनी के पिता ठाकुर कुंवर पाल सिंह एडवोकेट ने बताया कि बेटी को शुरू से ही न्यायिक सेवा में जाने की इच्छा थी। वकालत के दौरान ही वर्ष 2010 में रागिनी की शादी हाईकोर्ट प्रयागराज में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिसौदिया निवासी गांव मौरा के साथ हुई। शादी के बाद भी रागिनी ने अपने सपने को साकार करने की दिशा में प्रयत्न जारी रखा। आखिरकार उन्हें सफलता मिल ही गई। वर्तमान में वे जिला प्रयागराज के सिविल कोर्ट में अपर जिला जज के पद पर तैनात हैं।
महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहीं शाजिया जीनत
देवबंद। पूर्व पालिकाध्यक्ष जीनत नाज की पुत्री शाजिया जीनत वर्तमान में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में जुटी हैं। वह उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि अमेरिका के एक समाजसेवी संगठन से भी जुड़ी हैं। मोहल्ला शाहजीलाल निवासी शाजिया जीनत मदर टेरेसा फाउंडेशन जौनपुर (उत्तर प्रदेश) की देवबंद तहसील की अध्यक्ष, नारी शक्ति नारी सम्मान सेवा समिति की नगराध्यक्ष के अलावा हीरा फाउंडेशन न्यूयार्क (अमेरिका) की देवबंद अमेरिकन फीस एंबेसडर हैं। शाजिया का कहना है कि महिलाओं को शिक्षा के साथ-साथ राजनीति में भी प्रतिभाग करना चाहिए, साथ ही उन्हें अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए।

अदिति सिंह- फोटो : SAHARANPUR

शाजिया जीनत- फोटो : SAHARANPUR

जूली- फोटो : SAHARANPUR

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