सहारनपुर। निराश्रित और असहाय विधवा महिलाओं के सहारे के लिए शुरू की गई सरकारी पेंशन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिले में 132 महिलाएं पुनर्विवाह के बाद भी खुद को विधवा दर्शाकर पेंशन लेती रहीं, जबकि 501 महिलाओं की मौत के बाद भी उनके बैंक खातों में सरकारी धन पहुंचता रहा। सत्यापन में यह गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रोबेशन विभाग ने अपात्र लाभार्थियों से वसूली की तैयारी शुरू कर दी है।
जिले में संचालित निराश्रित महिला पेंशन योजना उन महिलाओं के लिए है, जिनके पति का निधन हो चुका है और जिनकी आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। योजना के तहत पात्र महिला को सालाना 12 हजार रुपये की सहायता राशि चार किस्तों में डीबीटी के माध्यम से दी जाती है। पात्रता के लिए लाभार्थी का जिले का निवासी होना, आयु 18 वर्ष से अधिक तथा परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम होना अनिवार्य है। शिकायतों के बाद प्रोबेशन विभाग ने खंड विकास अधिकारियों और उप जिलाधिकारियों के माध्यम से जिलेभर में लाभार्थियों की जांच कराई।
जांच में सामने आया कि 132 महिलाओं ने पुनर्विवाह के बावजूद योजना का लाभ लेना जारी रखा, जबकि 501 मृतक महिलाओं के नाम पर भी पेंशन जारी होती रही। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब विभाग अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है, जिन महिलाओं ने नियमों के विपरीत पेंशन ली है, उनसे वसूली की जाएगी। वहीं, मृतक और अपात्र लाभार्थियों के नाम पोर्टल से हटाकर नए पात्र आवेदकों को योजना से जोड़ा जा रहा है। जिले में वर्तमान में 81,200 निराश्रित महिला पेंशन लाभार्थी दर्ज हैं।
जून के अंत में आएगी पहली किस्त
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली किस्त जून के अंतिम सप्ताह में जारी की जाएगी। पात्र लाभार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से तीन हजार रुपये भेजे जाएंगे, जो अप्रैल, मई और जून की सहायता राशि होगी। विभाग का दावा है कि इस बार केवल सत्यापित और पात्र महिलाओं को ही पेंशन का लाभ मिलेगा।
पेंशन योजना के लाभार्थियों की जांच कराई गई, जिसमें यह मामला सामने आया है, जिन महिलाओं ने अपात्र होते हुए इसका लाभ लिया है उनसे वसूली की जाएगी।
- दुर्गेश प्रताप सिंह, प्रभारी जिला प्रोबेशन।