सहारनपुर के चर्च कंपाउंड स्थित पुरानी ब्रिटिश सिमेट्री के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने इसे वर्षों पहले संरक्षित स्मारक घोषित किया हुआ है, लेकिन कई कब्रों पर लगे शिलालेख तोड़ दिए गए हैं।
एएसआई द्वारा यहां नियुक्त किए गए कर्मचारी की आंखों के सामने कब्रों के ऊपर कचरा जलाया जा रहा है। एएसआई के अधिकारियों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
अंग्रेजों ने दिसंबर 1803 में मराठों को हराकर सहारनपुर में अपना वर्चस्व जमाया था। मिशन कंपाउंड और चर्च कंपाउंड के साथ ही रिमाउंट डिपो क्षेत्र में अंग्रेजों की सक्रियता अधिक रहती थी।
शोभित विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्र के समन्वयक एवं शोधार्थी राजीव उपाध्याय यायावर ने बताया कि चर्च कंपाउंड में चर्च के साथ ही उनके बंगले हुआ करते थे। अंग्रेजों के सैन्य अधिकारी यहां आकर ठहरते थे।
मुख्य सैन्य अधिकारी जेम्स पॉवेल हुए। जिला अस्पताल पुल के पास ढमोला नदी पर एक प्राचीन पुल बना है, जिसका निर्माण जेम्स पॉवेल ने कराया था। इसी वजह से पुल का नाम पॉवेल ब्रिज है।
1854 में उन्होंने चर्च कंपाउंड में सिमेट्री की स्थापना की। 1854 से सिमेट्री में अंग्रेजों को दफनाया जाता रहा। यहां कई कब्रों पर लगे 170 साल तक पुराने शिलापट पूरी कहानी बयां करते हैं, जिनपर कब्र में दफन व्यक्तियों के जन्म और मृत्यु की तिथि अंकित है।
कब्रों पर लगे शिलापटों को बहुत ही खूबसूरती के साथ तराशा गया है, जिनपर क्रिश्चियन क्रॉस बने हैं, जिनके साथ परियां तराशी गई हैं। बच्चों की कब्रों के चारों और लोहे की बाउंड्री बनी होती थी और ऊपर छत बनी होती थी।