सहारनपुर। ‘हम प्रेम पुजारी हैं, कंस हो सामने तो कृष्ण मुरारी हैं’ साहित्यकार डॉ. विजेंद्रपाल शर्मा ने यह पंक्तियां सुनाकर वाहवाही लूटी। मौका था रहती देवी ओमप्रकाश चैरिटेबल ट्रस्ट और साहित्यिक संस्था विभावरी की ओर से आयोजित कार्यक्रम का। इस दौरान लेखकों ने अपनी रचनाएं पेश कीं।
आदेश कुमार ने लाल बहादुर शास्त्री को समर्पित पंक्ति सुनाई कि वो सरल स्वभावी था, लाल था गुदड़ी का दुनिया में प्रभावी था सुनाई। हरिराम पथिक ने कलम न माने हार, लड़ाई जारी है, कसम सत्य लिखने रहने की धारी है सुनाया। विनोद भृंग ने जीना भी क्या जीना, जिसने औरों के जीने का हक छीना सुनाकर तालियां बटोरीं। राजीव उपाध्याय यायावर ने मेरा चलना जरूरी था, जख्म गहरे न हो जाएं उनका निकलना जरूरी था सुनाया। नरेंद्र मस्ताना ने उसके करीब जो गया, उसका ही हो गया, बातों का रंग यूं चढ़ा, सपनों में खो गया सुनाया। संदीप शर्मा से सुनाया कि चलिए आज तो हम गांधी जयंती मनाएंगे, भले ही फिर 364 दिन के लिए गांधी को भूल जाएंगे। बालेश्वर जैन ने आपका आशीष हमको उम्र भर मिलता रहे, आपने सींचा जिसे उपवन सदा खिलता रहे सुनाया। इस दौरान इतिहास के जानकार और शोधार्थी राजीव उपाध्याय यायावर को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रत्युष जैन, सत्यप्रकाश त्यागी, विनय जैन, पंकज जैन, डॉ. अजय शर्मा, शारिक अहमद, हितेशी जैन, आशुतोष सहगल आदि मौजूद रहे। कुमार