सहारनपुर शहर और कस्बों की महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले अधिक पढ़ी-लिखी, समझदार और चुनावी मुद्दों पर बेहतर बहस करने वाली मानी जाती हैं लेकिन पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में महिलाओं की वोटिंग के आंकड़े देखें तो स्थिति हैरान करने वाली है।
दरअसल, जब वोटिंग का नंबर आता है तब शहरी महिलाओं के मुकाबले देहात की महिलाएं ज्यादा मतदान करती हैं। वे चूल्हा-चौके से लेकर ग्रामीण पृष्ठभूमि की तमाम बंदिशों के बावजूद लोकतंत्र के पर्व में वे आगे रही हैं।
प्रमुख सियासी दल और उनके उम्मीदवार भी इस बात को अच्छी तरह जानते हैं। इसलिए वे भी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को बूथों तक लाने में भरसक प्रयास करते हैं।
गर्ल्स कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डा. गुंजन त्रिपाठी कहती हैं कि लोकतंत्र के पर्व में शहरी महिलाओं की जितनी भागीदारी होनी चाहिए, उतनी अभी नहीं हुई है।
इसकी शायद यह भी वजह हो कि मौजूदा राजनैतिक माहौल के प्रति उनमें खिन्नता हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप वोटिंग न करें। हर काम में आगे शहरी महिलाओं को वोटिंग में भी पीछे नहीं होना चाहिए। उनमें समझ तो है बस आगे आने की देर है।
वहीं, देहात में महिलाओं की उम्मीदें अधिक रहती हैं। वहां उम्मीदवार और समर्थकों की सक्रियता भी अलग होती है। इसका भी असर वोटिंग प्रतिशत पर पड़ता रहा है।
महिलाओं की वोटर स्थिति
बेहट 156553
नकुड़ 153665
सहारनपुर नगर 182625
सहारनपुर देहात 144982
देवबंद 149565
रामपुर मनिहारान 136552
गंगोह 163949