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यौन अपराधों में पीड़ितों को जल्द मिलेगा न्याय

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अधिवक्ता मनोज पंडित - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। गृह मंत्रालय की तरफ से यौन अपराधों में रिपोर्ट दर्ज करने की अनिवार्यता और दो माह में जांच के संबंध में जारी एडवाइजरी की महिलाओं और अधिवक्ताओं ने सराहना की है। उनका मानना है कि 25 फीसदी से अधिक मामलों में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं होती है। सरकार की सख्ती से पीड़ित को जल्द न्याय मिलेगा। पुलिस और कोर्ट के समक्ष हर माह यौन अपराधों से जुड़े 60 - 65 मामले आते हैं। इनमें अधिकतर दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के होते हैं। इनके अलावा कुकर्म और पॉक्सो एक्ट से संबंधित केस भी शामिल होते हैं। यौन अपराध से जुड़ी घटनाओं को सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्ती कार्रवाई किया जाना जरूरी है।
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फैसला अच्छा, समाज की जागरूकता भी जरूरी
विशेष लोक अभियोजक रहे अधिवक्ता मनोज कुमार पंडित कहते हैं कि यह कदम बेहद सराहनीय है। इसके साथ ही समाज को भी जागरूक होना पड़ेगा। यौन अपराधों के अधिकांश मामलों में परिवार, समाज या आरोपियों के दबाव में 25 फीसदी से अधिक पीड़ित पक्ष की तरफ से रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई जाती हैं। केस दर्ज करने में देरी, विवेचना की खामियों और अन्य कारणों से पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिलता है। प्राथमिकी में सही शब्दावली न होने के कारण भी केस प्रभावित होते हैं। आईपीसी की धारा 166 के तहत रिपोर्ट दर्ज न करने पर दोषी लोकसेवकों को एक साल की सजा और जुर्माने का प्राविधान है। पॉक्सो एक्ट की धारा 21 में भी रिपोर्ट दर्ज न करने पर छह माह तक कारावास और जुर्माने का प्राविधान रखा गया है।
लापरवाही करने वालों पर कुछ हद तक लगेगी लगाम
वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येंद्र तोमर कहते हैं कि यौन अपराधों में जल्द रिपोर्ट और जल्द जांच से जल्द न्याय की उम्मीद बंधेगी। लापरवाही बरतने वाले लोकसेवकों पर कुछ हद तक लगाम लगेगी। पीड़ित पक्ष का भी न्याय के लिए हौसला बढ़ेगा। संवेदनशील मामलों में राजनीतिक दखल भी नहीं होना चाहिए।
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वरिष्ठ अधिवक्ता एवं स्थायी लोक अदालत की सदस्य रहीं अल्पना तलवार कहती हैं कि जल्द रिपोर्ट और जांच हो, तभी जल्द न्याय की उम्मीद की जा सकती है, इसलिए महिला उत्पीड़न रोकने के लिए यह अच्छा कदम है। अब लोकसेवकों को भी सरकार की मंशा के अनुरूप अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
यौन अपराधों को किसी जाति या वर्ग से न जोड़ें
- महिला अधिवक्ता शबाना कहती हैं कि यौन अपराधों को किसी जाति या वर्ग से न जोड़ा जाए। पीड़ित पक्ष को जल्द न्याय मिलना चाहिए। सरकार को सख्त कानून बनाने के साथ लोकसेवकों पर भी निगरानी रखनी चाहिए ताकि वे उसके अनुरूप कार्य कर रहे हैं या नहीं।
पीड़ित पक्ष के उत्पीड़न में कमी आएगी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की महिला जिलाध्यक्ष ज्योति शर्मा कहती हैं कि ऐसी सख्ती से पीड़ित पक्ष के उत्पीड़न में कमी आएगी। वैसे तो भारतीय कानून में पहले ही कड़ी सजा के प्राविधान हैं, लेकिन महिलाओं को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा।

अधिवक्ता सत्येंद्र तोमर- फोटो : SAHARANPUR

अल्पना तलवार- फोटो : SAHARANPUR

अधिवक्ता शबाना- फोटो : SAHARANPUR

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