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लॉकडाउन में तबाह हो गए सब्जी उत्पादक किसान

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छुटमलपुर की मुजफ्फराबाद मंडी से ट्रक में लोड होती सब्जियां - फोटो : SAHARANPUR
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छुटमलपुर (सहारनपुर)। लॉकडाउन में सब्जी और पालेज उत्पादक किसान तबाह हो गए हैं। खरीदार न होने की वजह इस बार मंडी में उन्हें गत वर्ष की अपेक्षा तिहाई से भी कम भाव मिल रहा है। इसके चलते उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। टमाटर और खीरे की फसल तो इस सीजन में बुरी तरह पिट गई है।
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क्षेत्र के पचास से ज्यादा गांवों में बड़ी संख्या में किसान सोलानी, हिंडन, लालो आदि नदी में पालेज लगाते हैं। इसके साथ ही इस इलाके में सब्जी की खेती भी व्यापक पैमाने पर होती है। इसके लिए बहुत से भूमिहीन पांच हजार रुपये प्रति बीघा जमीन ठेके पर लेकर केवल सब्जी पैदा करने का ही काम करते हैं। पिछले सालों तक तीन माह की सब्जी की फसल में ये किसान साल भर का खर्च आसानी से निकाल लेते थे, लेकिन इस बार लॉक डाउन के चलते सब्जी उत्पादक किसान बरबाद हो गए हैं। अलावलपुर गांव निवासी खीरा उत्पादक पप्पू, रोहताश, गुडंब के राव फरमान, डाडा पट्टी के राकेश सैनी ने कहा पिछले साल तीन सौ रुपये प्रति बैग तक खीरा बिका था, जबकि इस बार मात्र पचास साठ रुपये ही बिक रहा है। विगत वर्ष तीस रुपये प्रति किलो बिकने वाला टमाटर पांच रुपये पर बिक रहा है। खेड़ी के सुक्कड़, सोनू, शेरपुर के असगर, शमी, अमानतगढ़ के इसरार का कहना है कि इससे लागत भी नहीं निकल रही है।
छुटमलपुर मंडी यार्ड के आढ़ती अंकित गोयल और विकास गुप्ता का कहना है कि लॉकडाउन के चलते होटल, ढाबे, शादी और सभी तरह की पार्टियां सब बंद हैं। इसके साथ ही माल बाहर भेजने में भी परेशानी आ रही है। उठान न होने के चलते सब्जी और पालेज का बुरी तरह मंदा है।
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सब्जी / पालेज विगत वर्ष भाव प्रति किलो इस वर्ष भाव
टमाटर 30 5
लोकी 25 4
तुरई 30 12
करेला 35 10
खरबूजा 40 12
कद्दू 10 3
तरबूज 15 6
ककड़ी 20 8
नोट - भाव छुटमलपुर मंडी यार्ड में थोक विक्रेता से लिए हैं।

आढ़त पर बिक्री के लिए रखे खीरे के बैग- फोटो : SAHARANPUR

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