गन्ना विभाग के तमाम प्रयास किसानों को समय पर गन्ना मूल्य भुगतान दिलाने में विफल साबित हो रहे हैं। सहारनपुर जिले की दो चीनी मिलों पर गत सीजन के 118 करोड़ रुपये बकाया हैं। मौजूदा पेराई सत्र के 351 रुपये सभी छह मिलों पर बकाया हो गए हैं। इस लिहाज से मिलों पर 469 करोड़ रुपये बकाया हैं। हालांकि करीब 44 करोड़ रुपये की बफर एवं निर्यात सब्सिडी प्राप्त करने वाली देवबंद और शेरमऊ चीनी मिलों ने गत सीजन में खरीदे गए गन्ने का भुगतान कर दिया है।
केंद्र सरकार चीनी मिलों को बफर स्टॉक एवं निर्यात पर सब्सिडी देती है। चीनी मिलों को इस सब्सिडी का उपयोग गन्ना मूल्य भुगतान के लिए करना होता है। जनपद में अब तक देवबंद और शेरमऊ चीनी मिलों को ही यह अनुदान प्राप्त हुआ है। जबकि अन्य मिल अभी प्रक्रिया में हैं। जनपद में गांगनौली और नानौता चीनी मिलों पर गत सीजन के 118 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य के अब भी बकाया हैं। इनमें से गांगनौली पर करीब 68 करोड़ और नानौता मिल पर 50 करोड़ रुपये बकाया है।
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इसके अलावा इस सीजन में भी देवबंद, शेरमऊ और गागलहेड़ी ने ही गन्ना मूल्य भुगतान करना शुरू किया है। जिले की मिलों पर इस सीजन का भी 351 करोड़ रुपये बकाया हो गया है।
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जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि बफर एवं एक्सपोर्ट सब्सिडी वाली धनराशि को एसक्रो अकांउट के माध्यम से गन्ना मूल्य भुगतान के लिए उपयोग किया जाता है। सब्सिडी प्राप्त करने वाली देवबंद और शेरमऊ चीनी मिलों ने गत सीजन का पूरा बकाया भुगतान के साथ ही इस सीजन में खरीदे गए गन्ने का भुगतान करना शुरू कर दिया है। चीनी मिलों पर बकाया भुगतान करने के लिए दबाव बनाया गया है।
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