प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. सचिन मलिक का कहना है कि सोनिया की हालत अधिक खराब थी। बच्ची पेट में ही मर गई थी। स्टाफ ने बड़ी सावधानी के साथ प्रसव कराया है। मामले में सोनू ने एंबुलेंस चालक के खिलाफ शिकायती पत्र दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है।
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नवजात बच्ची अभी जिंदा, जांच करेंगे
102 एंबुलेंस सेवा के प्रभारी जितेंद्र को बच्ची की मौत होने का पता नहीं है। जितेंद्र का कहना है कि सोनिया के परिवार की ओर से एंबुलेंस को फोन ही नहीं किया गया था। एंबुलेंस किसी और मरीज को लेने के लिए जा रही थी। रास्ते में एंबुलेंस को रोककर सोनिया और उसके परिजन सवार हुए थे। जितेंद्र ने बताया कि एंबुलेंस चालक और गर्भवती के पति सोनू का शिकायती पत्र उन्हें प्राप्त हुआ है, लेकिन नवजात बच्ची की अभी मौत नहीं हुई है उसका इलाज चल रहा है। दोनों पक्षों की बात सुनकर मामले की पड़ताल कराई जाएगी।
यदि गर्भवती को एंबुलेंस चालक द्वारा प्रसव पीड़ा में सड़क पर छोड़ा गया है तो यह गंभीर मामला है। इसके बाद नवजात की मौत हो जाना और गंभीर स्थिति को दर्शाता है। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि वास्तव में एंबुलेंस चालक ने ऐसा किया है तो कार्रवाई के लिए लखनऊ पत्र लिखा जाएगा। -
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी