जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि आज जो मस्जिदें हटाई जा रही हैं, वह फिर आबाद होंगी। सत्ता में बैठे लोग हमेशा नहीं रहेंगे, लेकिन इस्लाम कायम रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा दौर में मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम और उनकी धार्मिक पहचान को भी निशाना बनाया जा रहा है।
दारुल उलूम देवबंद में सम्मेलन।
- फोटो : अमर उजाला
दारुल उलूम देवबंद में आयोजित कुलहिंद राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया के सम्मेलन में देशभर से आए मदरसों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि नई पीढ़ी की धार्मिक और नैतिक शिक्षा की जिम्मेदारी केवल मदरसों की नहीं है। माता-पिता को भी बच्चों के ईमान, आस्था, चरित्र और नैतिकता पर ध्यान देना चाहिए।
दारुल उलूम देवबंद में सम्मेलन।
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मौलाना मदनी ने कहा कि मदरसे इस्लाम और ईमान के रक्षक और कौम की धार्मिक पहचान के अमानतदार हैं। दारुल उलूम के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान के बुजुर्गों और उलमा ने देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कुर्बानियां दीं। इसके बावजूद मदरसों की छवि को गलत तरीके से पेश करने की कोशिशें गलत हैं।
मौलाना मदनी ने मस्जिदों और धार्मिक संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले की सरकारें मुसलमानों को निशाना बनाती थीं, जबकि मौजूदा सरकार में इस्लाम और धार्मिक पहचान को भी निशाना बनाया जा रहा है। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सत्ता और ताकत के बल पर किसी कौम की आस्था को खत्म नहीं किया जा सकता।
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि मौजूदा हालात में नई पीढ़ी की धार्मिक शिक्षा, शैक्षिक संस्थानों की मजबूती और आपसी एकता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसलिए सभी मदरसों के जिम्मेदार विशेष रूप से ध्यान रखें कि दीनी इदारों के असल मकसद से हटकर नहीं, बल्कि इस्लाम के बुनियादी उसूलों पर चलते हुए छात्रों को तालीम दी जाए। ताकि वह इस्लाम की सही तस्वीर दुनिया के सामने पेश कर सकें।
छह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित
सम्मेलन में राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया के महासचिव मौलाना शौकत अली कासमी बस्तवी ने पिछली मजलिस-ए-आमला की कार्रवाई और वार्षिक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में प्रांतीय शाखाओं की बैठकें, शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, सामूहिक परीक्षाएं, मदरसों का निरीक्षण, सामाजिक सुधार से जुड़े कार्यक्रम और मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोहों की जानकारी दी गई। इस दौरान कार्यकारिणी और सामान्य सभा के सदस्यों के विस्तार की घोषणा के साथ केंद्रीय कार्यालय के नियमों की कुछ धाराओं में संशोधन को भी मंजूरी दी गई।
सम्मेलन में शिक्षा व प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने, धार्मिक आस्थाओं की रक्षा, मदरसों की आंतरिक व्यवस्था मजबूत करने, राब्ता-ए-मदारिस और उसकी प्रांतीय शाखाओं को सक्रिय बनाने, दीनियात के मकतब स्थापित करने और शोक प्रस्ताव से संबंधित छह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों और नेपाल के करीब आठ हजार मदरसों के प्रतिनिधियों, उलमा और विद्वानों ने भाग लिया।