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यूपी चुनाव 2022: सहारनपुर की बेहट सीट पर निर्णायक की भूमिका में रहते हैं मुस्लिम मतदाता, जानें क्या है इतिहास

Mon, 17 Jan 2022 09:42 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर

सार

सहारनपुर की बेहट सीट पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक की भूमिका में होते हैं। इस सीट पर ज्यादातर निर्दलीय प्रत्याशी ने ही जीत हासिल की है। जानिए आखिर इस सीट का इतिहास क्या है।
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मतदाता। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सहारनपुर में बेहट विधानसभा सीट पर विधायकी का ताज ज्यादातर राजपूत बिरादरी के सिर पर ही सजता रहा है। हालांकि इस सीट पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक की भूमिका में रहते हैं। ठाकुर सरदार सिंह दो बार निर्दलीय, ठाकुर अमर सिंह एक बार निर्दलीय चुनाव जीते तो जगदीश राणा तीन बार विधायक बने। 2012 में परिसीमन के बाद जगदीश सिंह राणा के छोटे भाई महावीर सिंह राणा बसपा के टिकट पर चुनाव जीते। 2017 में यहां के लोगों का मूड बदला और पिछड़े वर्ग से कांग्रेस के टिकट पर नरेश सैनी विधायक बने। इस बार नरेश सैनी भाजपा से चुनाव मैदान में हैं, जिनके सामने इस सीट को भाजपा की झोली में डालने की चुनौती होगी। यहां अब तक केवल एक बार वर्ष 1993 में भाजपा से रानी देवलता ही निर्वाचित हुई है।

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परिसीमन के बाद बसपा-कांग्रेस ने जीत हासिल की
2012 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई बेहट विधान सभा का क्षेत्र इससे पहले सरसावा और मुजफ्फराबाद विधानसभा सीटों के अंतर्गत आता था। पहली बार 2012 में बेहट विधान सभा सीट पर हुए चुनाव में बसपा प्रत्याशी महावीर सिंह राणा ने जीत हासिल की थी। वह 514 वोट के बेहद कम अंतर से चुनाव जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के नरेश सैनी को हराया था। महावीर राणा को 70, 274 और नरेश सैनी को 69,760 वोट मिले थे, जबकि सपा के उमर अली खान तीसरे नंबर पर रहे थे। उन्हें 47,291 वोट मिले थे। 2017 में यह सीट कांग्रेस को मिली। कांग्रेस प्रत्याशी नरेश सैनी को 97,035 वोट मिले थे, उन्होंने भाजपा प्रत्याशी महावीर राणा को 25,856 वोट से हराया था। महावीर राणा को 71,449 वोट मिले थे, जबकि बसपा प्रत्याशी हाजी मो. इकबाल तीसरे नंबर थे। उन्हें 71,019 वोट मिले थे। 

धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के साथ ही बेहट को आयरन हैंडीक्राफ्ट उद्योग के उत्पादों व फल पट्टी से होने वाले आम के निर्यात के लिए भी विश्व स्तर पर पहचाना जाता है। यहां हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र शिवालिक पहाड़ियों में स्थित आदिशक्ति मां शाकंभरी सिद्धपीठ कई धार्मिक व ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी है, तो दूसरी तरफ रायेपुर में हजरत रायेपुरी की खानकाह। मुस्लिम समुदाय की आस्था से जुड़ी खानकाह रहिमियां। जंगे आजादी में खानकाह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यहीं से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ तहरीक ए रेशमी रुमाल शुरू हुई थी।
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मतदान बूथ    439
मतदान केंद्र   216 


बेहट विधान सभा सीट पर मतदाता 
कुल       369877
महिला    175725
पुरुष      194140
थर्ड जेंडर 12

अब तक के विधायक 
वर्ष           विधायक        पार्टी
1952-    सुर्जन सिंह       कांग्रेस 
1957-    महमूद अली     कांग्रेस
1962-    सरदार सिंह      निर्दलीय
1967-    सरदार सिंह      बीकेडी
1969-    मुल्कीराज सैनी  सोशलिस्ट पार्टी
1974-    हाफिज असलम कांग्रेस
1977-    हाजी शमशाद   जनता पार्टी
1980-   बाबू अमर सिंह   निर्दलीय
1985-   असलम खान    कांग्रेस
1989-  असलम खान    जनता दल
1991-  जगदीश राणा   जनता दल
1993-  रानी देवलता    भाजपा
1996   जगदीश राणा   सपा
2002   जगदीश राणा   सपा
2007   इमरान मसूद   निर्दलीय
2012   महावीर राणा  बसपा
2017   नरेश सैनी      कांग्रेस 

जातिगत आंकड़े (लगभग)
जाति               मतदाता
मुस्लिम        1,55,000 
दलित            75,000
गुर्जर               9,000
सैनी            32,000
कश्यप         16,000
राजपूत         13,000 
ब्राह्मण          5,000 
चौहान         10,000
जाट            7,000
वैश्य           4500
पाल            5500
प्रजापति        4800
धीमान          5000
बंजारा          7000
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