सरसावा (सहारनपुर)। जन्म से ही मुड़े हुए पैरों (क्लब फुट) का इलाज अब मेडिकल कॉलेज में ही हो सकेगा। इसके लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की पहल पर दो विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम का गठन हुआ है जो बीमारी का पूरी तरह से नि:शुल्क इलाज करेंगे।
सोमवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी के पीएमआर तथा अस्थि रोग विभाग के चिकित्सकों डॉ. विनय कनौजिया तथा डॉ. मनोज आर्य ने इस विषय में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. विनय कनौजिया ने बताया कि क्लब फुट एक जन्मजात बीमारी है जो नवजातों में ही पनपती है। इसमें घुटने से नीचे का हिस्सा विशेषकर एड़ी तथा टखने के साथ ही एक या दोनों पैर या फिर पंजे भीतर की तरफ मुड़े होते हैं। यदि इस बीमारी का इलाज समय पर ना किया जाए तो उम्र के विकास के साथ बिना सहारे के अपने पैरों के बलबूते पैदल चलना मुश्किल होता है। इलाज के लिए फिजिकल मेडिसिन रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) विभाग तथा अस्थि रोग विभाग की संयुक्त आवश्यकता पड़ती है क्योंकि इसमें दोनों विशेषज्ञ चिकित्सक ये तय करते हैं कि बच्चे के पैरों पर केवल प्लास्टर बांधने से काम चलेगा अथवा उसकी सर्जरी करनी पड़ेगी।
अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार आर्य ने बताया कि बीमारी को क्लब फुट इसलिए कहते हैं क्योंकि तीन चार बीमारियां एक साथ होने के कारण ये स्थिति पैदा होती है। क्लब फुट के इलाज के लिए नवजात के जन्म लेने के पश्चात जितनी जल्दी हो सके विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाना चाहिए। क्योंकि इस समय नवजात की हड्डियां मुलायम होती हैं और उनको सही आकार देने के लिए प्लास्टर बांधा जाता है, जो प्रत्येक सप्ताह बदलने के साथ 6 से 8 सप्ताह तक बांधा जाता है विशेष परिस्थितियों में सर्जरी भी करनी पड़ती है।
दोनों चिकित्सकों ने सलाह दी कि यूं तो क्लब फुट बीमारी का इलाज 17 या 18 साल तक की उम्र में भी हो सकता है, परंतु उस समय कठिनाई ये होती है कि हड्डियां विकास कर चुकी होती हैं, जबकि जन्म के समय हड्डियां विकास की प्रक्रिया में होती हैं जिन को आकार दिया जा सकता है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की ओपीडी के कमरा नंबर 4 में क्लब फुट के लिए विशेष दिन विशेष समय निर्धारित किया गया है जहां प्लास्टर से लेकर सर्जरी तक समस्त इलाज नि:शुल्क उपलब्ध होगा।
क्लब फुट बीमारी की स्थिति- फोटो : SAHARANPUR
डॉ विनय कनौजिया- फोटो : SAHARANPUR