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इच्छाओं पर विराम लगाना है उत्तम तप धर्म

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दशलक्षण पर्व पर चन्द्र नगर जैन मन्दिर पूजा अर्चना करते जैन समाज के लोग - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। जैन बाग स्थित प्राचीन दिगंबर जैन जिनालय में दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना की गई। बताया गया कि उत्तम तप धर्म का पालन करने से जीवन में निर्मलता आती है और दुखों से छुटकारा मिलता है।
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व्रती सीए अनिल जैन ने बताया कि कर्मों के क्षय के लिए तप आवश्यक है। इच्छाओं पर विजय पाना ही तप है। संयम धर्म में इच्छाओं पर नियंत्रण रखना था और तप धर्म में इच्छाओं की उत्पत्ति पर ही विराम लगाना है। जब इच्छाएं उत्पन्न ही नहीं होंगी तो, नियंत्रण का प्रश्न ही नहीं आएगा, वही सच्चा तप है। पांचों इंद्रियों के विषयों तथा चारों कषायों को रोककर शुद्ध ध्यान की प्राप्ति के लिए जो अपनी आत्मा का ध्यान करता है, उसे नियम से तप होता है। ऐसा करके राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया, लोभ आत्मा से दूर हो जाएगी।
सम्यक तप तो महा मुनिराजों को ही होता है, लेकिन श्रावकों को भी शक्ति अनुसार तप करना चाहिए। संयम की तरह तप भी चारों गतियों में केवल मनुष्य गति में ही संभव है। जीव उत्तम तप धर्म धारण करने के लिए मनुष्य भव को प्राप्त करने के लिए तरसते हैं। उत्तम कुल, निरोगी काया जिनेंद्र प्रभु का उपदेश और जिनवाणी सुनने की रुचि ये सब सुसंयोग अति दुर्लभता से प्राप्त होते हैं। जो जीव इन संयोगों के मिलने पर पंचेंद्रिय के विषय और कषाय-जनित परिणामों का त्याग कर उत्तम तप को अंगीकार करते हैं, वे इस अमूल्य मनुष्य भव को सार्थक करते हैं।
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इसी से मन वचन काय की विशुद्धि और निर्मलता आती है। संसार के दुखों से छुटकारा मिलता है और सच्चे सुख की प्राप्ति होती है।
इससे पूर्व प्रात: काल में तीर्थंकर महावीर स्वामी की अतिशयकारी मूर्ति के अभिषेक शांतिधारा एवं पूजा में पंडित राजकुमार जैन, अजय जैन, अतुल जैन, श्रेयांश जैन, सुदेश जैन, दिनेश जैन, नाभीराय, अशोक जैन, प्रकाम जैन, सौरभ जैन, दीपक जैन, संयम जैन, मनीष जैन आदि मौजूद रहे।

दशलक्षण पर्व पर चन्द्र नगर जैन मन्दिर पूजा अर्चना करते जैन समाज के लोग- फोटो : SAHARANPUR

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