सहारनपुर। कर्ज की जिस दलदल में फंसकर परिवार के पांच सदस्यों ने जहर निगला अब उस परिवार की जिंदगी चंदे पर आकर टिक गई है। पत्नी और बेटे की मौत हो चुकी है, जबकि अस्पताल में भर्ती परिवार का मुखिया विकास और उसकी दोनों बेटियां जिंदगी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, जिनका उपचार अलग-अलग निजी अस्पतालों में चंदे के भरोसे चल रहा है। प्रशासन की तरफ से भले ही तमाम दावे किए जा रहे हो, लेकिन अभी तक इलाज के लिए आर्थिक तौर पर कोई मदद नहीं की गई।
मीडिया से बातचीत के दौरान भाई शक्ति ने बताया कि विकास का उपचार दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा है, जबकि बेटी परी व पलक बाजोरिया रोड के एक निजी अस्पताल में भर्ती है। तीनों की हालत स्थिर है। शक्ति ने बताया कि जिस अस्पताल में भाई का इलाज चल रहा है वहां अभी तक केवल 20 हजार रुपये ही जमा करा पाए हैं। वहीं, परी और पलक जहां भर्ती है वहां पर केवल सात हजार रुपये ही जमा हुए हैं। अब तक इलाज में जो खर्च आया है, किसी तरह उसका बंदोबस्त कर पाए। रिश्तेदार और अन्य लोगों से सहयोग मांग रहे हैं। अस्पताल का खर्च बढ़ रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि एकदम इतना खर्च कैसे उठाया जा सके। शक्ति ने बताया कि प्रशासन की तरफ से अभी उपचार के लिए आर्थिक तौर पर कोई सहयोग नहीं मिला है। भाई पर कर्ज भी अधिक है। उसे भी चुकाना है।
बता दें, कि नंदी फिरोजपुर गांव निवासी विकास, उसकी पत्नी रजनी, बेटी परी, पलक और बेटे विवेक ने सोमवार को हराेड़ा गांव के पास जहर निगल लिया था। इसमें रजनी और विवेक की मौत हो चुकी है। कर्ज के चलते उन्होंने यह कदम उठाया था।
कर्ज को लेकर रात में रोते थे दपंती
शक्ति ने बताया कि विकास और उसकी पत्नी रजनी पर सात से आठ फाइनेंस कंपनियों का कर्ज है। उन्होंने एलईडी, बाइक, वाशिंग मशीन आदि सामानों को फाइनेंस पर लिया था। कर्ज अधिक होने के चलते दंपती रात में रोते थे। वह काफी दिनों से परेशान भी थे। वह रोजाना कर्ज को लेकर बात करते थे।
आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारियों का कलक्ट्रेट व पुलिस लाइन में प्रदर्शन
सहारनपुर। कर्ज से परेशान होकर पांच सदस्यों के जहर निगलने के मामले में आजाद समाज पार्टी भी सामने आ गई है। बुधवार को राष्ट्रीय महासचिव कमल वालिया के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारी और ग्रामीण कलक्ट्रेट और पुलिस लाइन में पहुंचे। डीएम-एसएसपी को शिकायत की। कमल वालिया ने कहा कि पीड़ित परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। परिवार के मुखिया विकास और उनकी पत्नी रजनी ने घर चलाने और बच्चों की परवरिश के लिए कई फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लिया था। आरोप है कि फाइनेंस कंपनियों की प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान के कारण विकास व रजनी ने यह कदम उठाया। उन्होंने प्रशासन से इन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा पीड़ित परिवार को बेहतर इलाज, 10 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी की भी मांग की। इस दौरान शौर्य अंबेडकर, रविंद्र प्रधान, कर्मसिंह, राजेंद्र, विशाल, मोहम्मद बिलाल, शिवकुमार आदि रहे।