सहारनपुर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से जनपद के 2,37,903 परिवार अभी तक जुड़ चुके हैं। अनुमान के अनुसार इन परिवारों के सदस्यों की संख्या करीब 11 लाख से अधिक है। खास बात यह है कि बीते तीन साल में जनपद में 11 लाख के सापेक्ष तीन लाख ही गोल्डन कार्ड बने हैं। कार्ड बनाने में सहारनपुर प्रदेश में तीसरा स्थान है।
गरीबों को देश के बेहतर से बेहतर निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा देने के लिए केंद्र सरकार ने तीन साल पहले आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू की थी। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर सरकार ने जनपद के 1,15,023 परिवारों को योजना में शामिल किया था। इसके बाद जनपद के साथ ही प्रदेश भर में आवाज उठी कि कई गरीब परिवार योजना से अछूते रह गए हैं। इसके बाद प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान शुरू किया। जनपद के 22,087 परिवारों को अभियान से जोड़कर आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाया गया। इनके बाद योजना में शामिल परिवारों की कुल संख्या 1,37,110 हो गई थी। इन परिवारों के सदस्यों की संख्या 6,85,550 थी, जिनके गोल्डन कार्ड पहले दिन से बनाए जा रहे हैं। अब सरकार ने पंजीकृत श्रमिकों के 46,175 परिवारों को योजना में शामिल किया है। इनके अलावा 54618 परिवार अंत्योदय कार्ड धारकों के शामिल किए गए हैं। इस प्रकार अभी तक कुल 2,37,903 परिवार योजना में शामिल हो चुके हैं। एक अनुमान के अनुसार इन परिवारों के सदस्यों, जिनके गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं कि संख्या 11 लाख से अधिक बैठती है। इनमें से सहारनपुर अभी तक तीन लाख सदस्यों के गोल्डन कार्ड बनाकर प्रदेश में तीसरे स्थान पर आ गया है।
कार्ड बनाने को राशन डिपो पर लगेंगे शिविर
गोल्डन कार्ड बनाने में गति लाने के लिए अब सरकारी राशन डिपो पर शिविर लगाए जाएंगे। चूंकि अंत्योदय कार्ड धारक 54618 परिवार योजना में शामिल किए गए हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि कम से कम अंत्योदय कार्ड धारकों के गोल्डन कार्ड तो राशन डिपो पर शिविर लगाकर बन ही जाएं, जिससे अधिक से अधिक लोग योजना का लाभ किसी भी समय लेेने के लिए तैयार रहें।
तीन लाख गोल्डन कार्ड बनाने के साथ ही सहारनपुर ने प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त कर लिया है। गोल्डन कार्ड सभी सरकारी अस्पतालों, योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों और जन सेवा केंद्रों पर बनाए जा रहे हैं। गति लाने के लिए राशन डिपो पर भी शिविर लगाकर कार्ड बनाने के निर्देश मिले हैं।
डॉ. सुशील कुमार गुप्ता, नोडल अधिकारी।