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आयुष्मान कार्ड नहीं बनवाने पर इलाज में हो सकती है परेशानी

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सहारनपुर। आयुष्मान भारत योजना को शुरू हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन जनपद में योजना में शामिल पात्रों में से मात्र 30 फीसदी ही लोग ही अभी तक आयुष्मान कार्ड (गोल्डन कार्ड) बनवा सके हैं। जबकि आयुष्मान कार्ड के बिना पात्र को भी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।
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प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना वर्ष 2019 में शुरू की गई थी। इसमें वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर लाभार्थी परिवारों का चयन किया गया था। प्रदेश भर में विभिन्न गरीब लोग योजना में शामिल होने से छूट गए थे। इसके बाद प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान शुरू किया। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से जुड़े लाभार्थियों की संख्या 1 लाख 37 हजार है, जबकि इन परिवारों के सदस्यों की संख्या छह लाख 85 हजार है। पात्रों की लापरवाही के कारण आयुष्मान कार्ड बनाने की गति बेहद धीमी है। करीब छह माह पहले पंजीकृत श्रमिकों के परिवारों को भी योजना में शामिल किया गया है। बीते कुछ समय पहले ही अंत्योदय कार्डधारकों के परिवारों को योजना से जोड़ा गया है। इनके बाद जनपद में लाभार्थियों की संख्या 9 लाख 19 हजार हो गई है, जबकि आयुष्मान कार्ड बनने की बात करें तो अभी तक तीन लाख 24 हजार ही गोल्डन कार्ड बनवा सके हैं। आयुष्मान कार्ड नहीं होने पर आपात स्थिति में संबंधित निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज नहीं मिल सकता है। बीते तीन साल में कई लोग आयुष्मान कार्ड नहीं बनवाने का खामियाजा भुगत चुके हैं।
यहां बनवाएं आयुष्मान कार्ड
योजना में शामिल लोगों के आयुष्मान कार्ड एसबीडी जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी और सभी सीएचसी पर मुफ्त में बनाए जाते हैं। इनके अतिरिक्त सभी जनसेवा केंद्रों पर निर्धारित शुल्क जमा कराकर आयुष्मान कार्ड बनवाया जा सकता है। इसके लिए पात्रों के पास योजना से जुड़ा पत्र होना चाहिए, जिसमें उसका नाम हो। आयुष्मान कार्ड बनाने में गति लाने के लिए समय-समय पर गांवों और शहर में शिविर आयोजित किए जाते रहे हैं।
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वर्जन
आयुष्मान कार्ड नहीं होने की स्थिति में यदि अचानक अस्पताल में भर्ती किया जाता है तो 48 घंटे के भीतर गोल्डन कार्ड बनवाकर प्रस्तुत करना होता है। यदि ऐसा नहीं होता है तो मरीज को इलाज का पूरा पैसा जेब से चुकाना पड़ता है। पात्रों को चाहिए कि वे कार्ड बनवाकर सुरक्षित रखें। अन्यथा मुफ्त इलाज से वंचित होना पड़ सकता है।-डॉ. धर्मवीर सिंह, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना सहारनपुर
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