सहारनपुर। संसाधनों की कमी और खराब व्यवस्था के चलते सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। लोगों का रुझान सरकारी के बजाय प्राइवेट अस्पतालों की तरफ बढ़ रहा है। खास बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसवों की संख्या कम हुई है, लेकिन निजी अस्पतालों में संख्या बढ़ी है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल समेत 18 स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव की सुविधा है। प्रसव में आशा कार्यकर्ता अहम भूमिका निभाती हैं, लेकिन कुछ आशा कार्यकर्ता ऐसी हैं, जो लालच में गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में भेज रही। यह आशा कार्यकर्ता मरीजों के तीमारदारों से सरकारी अस्पतालों की बदहाली बताती है, जबकि इन्हें सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को पहुंचकर प्रसव आदेश हैं। इसके लिए उन्हें भुगतान भी दिया जाता है। अप्रैल से अक्तूबर तक सरकारी अस्पतालों में 19,144 प्रसव हुए, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में 40,378 प्रसव कराए जा सके। इससे लगता है कि आशा कार्यकर्ता सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए प्रेरित नहीं कर रही हैं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने भी कम प्रसव पर नाराजगी जता चुके हैं।