छुटमलपुर। जल निगम की शाहजहांपुर पेयजल योजना पर लगा सोलर पावर प्लांट सरकारी सिस्टम की लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। लाखों रुपये की लागत से स्थापित किया गया यह सोलर पावर प्लांट पिछले आठ साल से धूल फांक रहा है।
शिवालिक जंगल से सटे तीन मजरों चांडीघेर, बारुगढ़ और शाहजहांपुर को शाहजहांपुर पेयजल योजना से आपूर्ति की जाती है। इन तीनों मजरों की आबादी छह हजार है। सरकारी स्तर पर यहां शाहजहांपुर और बारुगढ़ में तीन-तीन और चांडीघेर में चार हैंडपंप हैं, लेकिन इनमें से एक ही चालू है। यहां तीन 300 फीट गहराई पर पानी निकलता है। ऐसे में हैंडपंप लगवाने में कई लाख रुपये खर्च आता है, जो कमजोर आर्थिक स्थिति वाले व्यक्ति के बूते से बाहर की बात है। पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए यहां के ग्रामीण पूरी तरह पेयजल योजना पर ही निर्भर हैं।
पेयजल योजना पर टैंक नहीं बना हुआ है। बिजली आने पर डायरेक्ट नलकूप से सप्लाई दी जाती है। बिजली की बदहाल स्थिति के चलते नियमित पानी उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2016 में यहां सोलर पावर प्लांट लगाया गया था, जो कुछ माह चलने के बाद बिजली गिरने से तकनीकी खराबी आने पर बंद हो गया था। इसके बाद इसे चलाने की किसी ने सुध नहीं ली।