सहारनपुर के वुड कार्विंग बाजार में ठंड के चलते अलाव का सहारा लेते युवा
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ठंड से मशरूम में बढ़ी गलन की समस्या
सहारनपुर। बढ़ती ठंड मशरूम की खेती के लिए आफत बन गई है। इससे फसल में गलन की समस्या बढ़ रही है। इसके चलते मशरूम का उत्पादन प्रभावित हुआ है। जिले में 215 से अधिक मशरूम की इकाईयों पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है।
कम लागत और बढ़िया आमदनी के चलते जनपद में लगातार मशरूम उत्पादक किसानों की संख्या बढ़ रही है। इस समय जिले में 215 से अधिक मशरूम की इकाईयां संचालित हैं। इस समय सफेद बटन मशरूम की खेती हो रही है। इसके बढ़िया उत्पादन के लिए 15 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान और वातावरण में नमी 85 फीसदी होनी चाहिए। जनपद में लगातार गिर रहे तापमान के चलते मशरूम में गलन की समस्या पैदा हो गई है। कम तापमान में मशरूम में फफूंदी और जीवाणुओं के प्रकोप से गलन शुरू हो गई है। इसका सीधा असर मशरूम उत्पादन पर पड़ा है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और मशरूम विशेषज्ञ डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि मशरूम उत्पादन यूनिट का तापमान बढ़ाने के लिए झोपड़ी या कमरे को दिन में चार से पांच घंटे खोल कर रखें। इसमें बिजली के बल्ब भी जलाकर रखें। धुआं रहित अंगीठी को इकाई में रखें। छिड़काव के लिए ताजे पानी का प्रयोग करें। गल रहे मशरूम अवशेषों को केसिन मिट्टी से हटाते रहें।
वर्ष भर होता है जनपद में मशरूम का उत्पादन
जनपद में पूरे वर्ष मशरूम का उत्पादन होता है। अक्तूबर से मार्च तक सफेद बटन मशरूम की खेती होती है। फरवरी से अप्रैल तक आस्टर ढिंगरी मशरूम का उत्पादन जिले में होता है। मिल्की मशरूम की खेती का समय अगस्त से अक्तूबर माह तक है। जनपद के अधिकांश किसान मशरूम की तीनों प्रजातियों की खेती करते हैं।
मशरूम की खेती के फायदे
- कम लागत में अधिक मुनाफा
- पौषक तत्वों से भरपूर होने से बाजार में बढिया मांग
- कमरे या झोंपड़ी में खेती होने से सुरक्षित
- बाजार में अच्छा भाव