सहारनपुर। कोरोना काल में मलेरिया और डेंगू के मच्छर का डंक कमजोर पड़ गया है। इसकी वजह कोरोना काल में एंटी लार्वा और फॉगिंग के साथ-साथ अधिक मात्रा में सैनिटाइजेशन किया जाना है। नतीजा यह रहा है कि 2019 की तुलना में 2020 में मलेरिया के मामले 93 फीसदी और डेंगू के मामले 90 फीसदी कम सामने आए हैं।
पूर्व के वर्षों में जनपद में मलेरिया के मामले डेंगू की तुलना में अधिक रहे हैं। मगर बीते चार साल से मलेरिया के मामले कम होते गए हैं, जबकि डेंगू का प्रकोप बढ़ा है। वर्ष 2019 में जनपद में डेंगू ने जमकर कहर बरपाया था। सैकड़ों लोगों की जान डेंगू की वजह से गई थी। शहर के वार्ड आठ में शामिल गांव चक देवली में ही करीब 27 लोगों की जान डेंगू के कारण उत्तराखंड और हरियाणा के अस्पतालों में गई थी। यह अलग बात है कि चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने उन्हें डेंगू नहीं माना था, क्योंकि उनकी जांच जनपद से बाहर और किट से होना पाया गया था। अगले ही साल 2020 में कोरोना ने दस्तक दे दी। कोरोना से बचाव के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर सैनिटाइजेशन किया गया, साथ ही लोग तीन माह के संपूर्ण लॉकडाउन में अपने घरों में बंद रहे। साफ-सफाई के प्रति विशेष सावधानी लोगों ने बरती। नतीजा 2019 की तुलना में मलेरिया के मामले 93 फीसदी और डेंगू के मामले 90 फीसदी कम दर्ज किए गए। इस बार यानी 2021 में अभी तक जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में मलेरिया और डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है।
बीते साल साल के आंकड़े
वर्ष-----------मलेरिया------ डेंगू
2017---------1125---------- 35
2018---------389----------- 63
2019---------191---------- 236
2020---------13------------ 22
मलेरिया, डेंगू से बचने के उपाय
तेज बुखार होने पर पैरासिटामॉल की गोली ले सकते हैं। ठंडे पानी से शरीर को पोंछें। डेंगू उपचार के लिए कोई खास दवा या बचाव के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। दवाओं का सेवन चिकित्सकों की सलाह से करें। गंभीर मामलों के लक्षण (खून आना) होने पर चिकित्सालय में तुरंत संपर्क करें। एस्प्रीन व स्टेरायड दवाइयों का सेवन कभी न करें। डेंगू रोगी को मच्छरदानी का प्रयोग कराएं।
ध्यान रखने वाली बात
डेंगू को फैलाने वाला मच्छर शहरी, अर्द्धशहरी आबादी वाले मकानों में पाया जाता है। गंदी नालियों में यह मच्छर नहीं रहता। यह मच्छर घरों के साफ पानी में अंडे देता है। डेंगू का मच्छर घरों के अंदर यह पानी कूलर, छत, खुली टंकियों, टीन के खाली डिब्बों, पुराने टायरों, गमलों, खाली बोतलों, मनी प्लांट के गमलों आदि में प्रजनन कर अपनी संख्या बढ़ाता है। ऐसी जगहों पर पानी जमा ना होनेे दें।
संचारी रोगों से बचने को यह करें
- मच्छरों से बचने के लिए पूरी आस्तीन की शर्ट और फुल पैंट पहनें।
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
-मच्छरों को मारने के लिए बाजार में उपलब्ध क्वाइल आदि का इस्तेमाल करें।
-घरों के भीतर व आसपास पानी जमा न होने दें, कहीं पानी है तो उसमें मिट्टी के तेल का छिड़काव करें।
-छतों पर रखे खाली डिब्बे, पुराने टायर आदि में पानी जमा न होने दें।
-गमलों, कूलर, मनी प्लांट आदि में पानी जमा न होने दें आदि।
बीते कई साल से जनपद में मलेरिया और डेंगू पर काफी हद तक नियंत्रण लगा है। संचारी रोगों को फैलने से रोकने के लिए लगातार एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराई जा रही है। मार्च, जुलाई और अक्तूबर में पखवाड़ा मनाया जाता है, जिसमें जनता को जागरूक किया जाता है।
शिवांका गौड़, जिला मलेरिया अधिकारी।